दयानंद पांडेय
कृष्ण में यादव लिखा है ? कि दशरथ, लक्ष्मण , भरत आदि में सिंह ? बुद्ध भी क्षत्रिय थे l लिखते थे क्या सिंह ? हीनता और कुंठा वश दलित लोग सीना तान कर सिंह लिखते हैं l तो क्या सिंह बन जाते हैं ?
आप ही की मान लें तो क्या दलित शेर हैं ? शेर को आरक्षण क्यों चाहिए ? मुलायम कौन सा सिंह था ? यह सब कुतर्क है l बुद्ध तो जातिविहीन समाज और समता मूलक समाज की कल्पना करते थे l पर आज के यह नए वाले सिंह ? जाति ही ओढ़ते बिछाते हैं l आरक्षण का कटोरा लिए घूमते हैं l
आरक्षण का कटोरा , आरक्षण तक ही रखिए l बाक़ी जगह ले कर घूमने पर दुत्कारे जाइएगा l माइनस चालीस वाले डाक्टर से फिर इलाज करवाना पड़ेगा l करवाइएगा ?
मालूम है , अंबेडकर पहले मुस्लिम बनना चाहता था l अंग्रेजों का एजेंट था तो क्रिश्चियन बनने की भी पड़ताल की l पर उसे लगा कि बौद्ध बन कर हिंदू धर्म को ज़्यादा नुक़सान पहुंचा सकेगा l बौद्ध बन गया l बुद्ध राज परिवार से होते हुए भी राजनीतिक प्राणी नहीं थे l क्षत्रिय हो कर भी भिक्षाटन से काम चलाते थे l वृक्ष के नीचे रहते थे l महल छोड़ , कुटिया में रहते थे l संन्यासी थे l सुविधा रहित l
बुद्ध से अंबेडकर का क्या लेना देना ? अंबेडकर तो सुविधाखोर दलित था l ऐश से रहने वाला l अंग्रेजों और राजाओं के टुकड़ों पर पलने वाला l लेकिन बहुत शातिर था l
बुद्ध का राजनीतिक इस्तेमाल किया l
जैसे जिन्ना ख़ुद काफ़िर था l शराब पीता था l सुअर खाता था l पर पाकिस्तान बनाने के लिए , प्रधान मंत्री बनने के लिए , इस्लाम और मुसलमान का इस्तेमाल किया l अंबेडकर भी कभी दलितों का अलग देश बनाना चाहता था l
अच्छा हुआ होता जो पाकिस्तान की तरह एक दलितिस्तान भी बन गया होता l वह लोग भी ख़ुश रहते जैसे पाकिस्तान ख़ुश है l भारत में रह कर बहुत तकलीफ़ है l कम से कम आरक्षण जैसा कोढ़ और कैंसर तो नहीं होता l माइनस चालीस वाला डाक्टर तो नहीं मिलता l यह नफ़रत और यह दोमुंहापन तो नहीं मिलता l कि बहुत अन्याय हुआ l न्याय मिल गया होता l पर गांधी ने सब गुड़ गोबर कर दिया l पाकिस्तान बनने से नहीं रोक पाए , यह रोक लिया l
आज दलितों समेत तमाम राजनीतिक पार्टियां और नेता अंबेडकर को संविधान निर्माता बताते नहीं थकते l क्या सचमुच अंबेडकर संविधान निर्माता है ? अकेले ? 319 सदस्यों वाली संविधान सभा थी l इस संविधान सभा के अध्यक्ष थे राजेंद्र प्रसाद l वी एन राव सलाहकार l अंबेडकर सिर्फ़ एक ड्राफ्ट कमेटी का अध्यक्ष l दर्जनों कमेटियां थीं इस संविधान सभा की l तो बाक़ी लोग क्या घास छील रहे थे जो अंबेडकर संविधान निर्माता बन गया l फिर आरक्षण का प्राविधान तो गांधी के कहे पर किया गया था l सिर्फ़ दस बरस के लिए l फिर यह जन्म जन्मांतर के लिए हो गया है l
आरक्षण अब नासूर बन गया है l कैंसर और एड्स से भी ज़्यादा ख़तरनाक l
( अपनी ही पोस्ट पर आए एक कमेंट का यह जवाब l)
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