Sunday, 17 February 2019

आज ज़रूरत है इस इस्लामी और जेहादी हिंसा का जवाब सेना ही दे , कश्मीर सेना के हवाले हो

जगह-जगह कुछ लोग ऐसा नैरेटिव पेश कर रहे हैं कि कश्मीर में जो भी कुछ हो रहा है , वह नरेंद्र मोदी सरकार की ज़्यादतियों का नतीज़ा है । गरज यह कि कश्मीर मसला इन्हीं साढ़े चार साल की उपज है । बात कीजिए कश्मीर की , यह लोग नरेंद्र मोदी सरकार पर ठीकरा फोड़ने लगते हैं । सी आर पी एफ़ के जवानों की हत्या को जस्टीफाई करते हुए , खुशी मनाने लगते हैं । बिरयानी पार्टी मनाने लगते हैं। मानता तो मैं भी हूं कि नरेंद्र मोदी सरकार कश्मीर मसले पर पूरी तरह नाकाम रही है और समस्या का समाधान करने के लिए साढ़े चार साल महबूबा के साथ आइस-पाईस खेलती रही है । 

लेकिन कश्मीर समस्या अगर किसी ने पैदा की है तो सिर्फ़ और सिर्फ़ इस्लामिक जेहाद की मानसिकता और कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति ने । पाकिस्तान हमारी इसी कमजोरी का निरंतर लाभ लेता रहा है , आगे भी लेता रहेगा । इस्लाम अगर कश्मीर के बीच न आता और कि विभिन्न सरकारें मुस्लिम समाज के दंगाई तत्वों से न डरतीं , सेक्यूलर फोर्सेज के ब्लैकमेल के आगे न झुकतीं तो कश्मीर ही नहीं पूरे देश में आतंकवाद का नामोनिशान नहीं होता। मुस्लिम तुष्टिकरण की जगह , सेक्यूलर फोर्सेज की ब्लैकमेलिंग से मुक्त हो कर अमरीका , फ़्रांस , चीन , इजरायल आदि देशों की तरह इन देशद्रोही ताकतों से सिर्फ और सिर्फ गोली से पूरी निर्ममता से निपटना चाहिए । तय मानिए कि दो घंटे में देश आतंकवाद से मुक्त हो जाएगा। कैंसर और एड्स जैसी बीमारियों के साथ जितनी रियायत करेंगे , वह आप को उतना ही परेशान करेंगे । 

लेकिन क्या कीजिएगा जिस देश में एक फ़िल्मी डायलाग , हाऊ इज द जोश ! बोलना भी भाजपाई होना हो जाता है। भारत माता की जय बोलना , वंदे मातरम बोलना , सांप्रदायिक होना हो जाता है , उस देश में कभी कुछ नहीं हो सकता । मैं फिर से कहना चाहता हूं कि कश्मीर समस्या का हल बातचीत से नहीं सिर्फ़ और सिर्फ़ गोली से निकलता है । गवर्नर वगैरह हटा कर सिर्फ़ सेना के हवाले कश्मीर को कर दीजिए , दो दिन में सब कुछ दुरुस्त हो जाएगा । इस्लामिक जेहाद की हिंसा क़ानून और राजनीतिक संवाद से नहीं सुलझने वाली। यही उन की ताकत है । जिस दिन देश इन से इन की यह ताकत छीन लेगा , कश्मीर समस्या और आतंकवाद उसी दिन खत्म समझिए। सिर्फ और सिर्फ सेना ही इन का माकूल और मुकम्मल इलाज है । 

आज की तारीख़ में अहिंसा के रास्ते आप हिंसा से नहीं निपट सकते । यह गांधी युग नहीं है कि उपवास कर , अहिंसा से नोआखली जैसा भयानक दंगा रोका जा सकता हो । आज ज़रूरत है इस इस्लामी और जेहादी हिंसा का जवाब सेना ही दे। खुल कर दे । इस लिए भी कि भारतीय सेना अभी जाति और धर्म में नहीं , देश प्रेम में जीती और मरती है । हमारे सुरक्षा बल भी । देश प्रेम का तकाज़ा है कि कश्मीर अब पूरी तरह सेना के हवाले हो। कश्मीर ही क्यों , देश में जहां कहीं भी ऐसी कोई भी ताकत सिर उठाए , उसे पूरी सख्ती से फौजी बूटों और गोलियों से कुचलने की दरकार है। नो पुलिस , नो कोर्ट , नो सुनवाई । मौके पर फ़ाइनल कार्रवाई । जैसा कि कभी पंजाब में पुलिस अफ़सर के पी एस गिल ने किया था और पूरी तरह सफल रहे थे। कश्मीर और देश में फैले सभी जेहादियों के साथ पूरी निर्ममता से इसी एक सुलूक की ज़रूरत है। 

फौजी बूटों की आवाज़ सुनते ही दो दिन में यह लोग जेहाद , अलगाववाद और बहत्तर हूरों का ख्वाब भूल कर देश प्रेम सीख जाएंगे। सारी अकड़ फुर्र हो जाएगी । जैसे खालिस्तानियों की हो गई। इंदिरा गांधी जैसा यह कड़ा फैसला लेना काश कि नरेंद्र मोदी भी आज सीख जाते। इंदिरा गांधी ने तो जब ज़रूरत पड़ी थी , अमृतसर के स्वर्ण  मंदिर में सेना भेज कर कड़ी सैनिक कार्रवाई भी की थी। कश्मीर सहित देश की उन सभी मस्जिदों , मजारों और मदरसों में , जो जेहादी पैदा कर रही हैं , नमाज की आड़ में हिंसा का पाठ पढ़ा रही हैं , वहां पुलिस नहीं , सीधे सेना भेजनी चाहिए । नो कोर्ट , नो सुनवाई , मौके पर फाइनल करवाई । निदा फाजली लिख ही गए हैं :

उठ-उठ के मस्जिदों से नमाज़ी चले गए
दहशतगरों के हाथ में इस्लाम रह गया।