Wednesday, 20 May 2026

सवर्णों के ख़िलाफ़ जहरीला हथियार है अब आरक्षण

दयानंद पांडेय


संविधान निर्माताओं ने दलित और वंचित समाज के लिए दस वर्ष के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था कि यह लोग भी आर्थिक और सामाजिक तौर पर बराबरी में आ जाएं l देश के विकास में योगदान दें l बाद में मंडल की सिफारिशों के तहत पिछड़ी जातियों को भी आरक्षण मिल गया l आज़ादी के इन आठ दशक में आरक्षण ने आरक्षणधारियों को इतना सबल बना दिया है कि अब वह इसे सवर्णों के ख़िलाफ़ जहरीला हथियार बना चुके हैं l मरने-मारने पर आमादा हैं l

वोट बैंक के चक्कर में सभी राजनीतिक पार्टियों और नेताओं ने आरक्षणधारियों को भस्मासुर बना दिया है l हिंसक और अराजक बना दिया है l होता रहे देश प्रतिभाहीन, होता रहे प्रतिभा पलायन, वह तो माइनस चालीस वाले डाक्टर भी बना कर रहेंगे l देश में सामाजिक समता के नाम पर गहरी सामाजिक खाई बन गई है तो उन की बला से l यह आरक्षण जेहाद का ज़हर है l

आरक्षणधारी अब सवर्ण समाज के ख़िलाफ़ आक्रमणकारी बन कर उपस्थित हैं l इस्लाम के शरिया क़ानून से भी ज़्यादा ख़तरनाक और जहरीला हो चला है यह आरक्षण l यू जी सी आदि ने इस आग में घी का काम किया है l आप एक बार कैंसर और एड्स का इलाज कर सकते हैं l आरक्षण प्राप्त जहरीले लोगों का नहीं l राजनीतिज्ञों और सरकारों ने तो इसे इस हद तक पहुंचाया ही है l पता नहीं किसी सामाजिक विज्ञानी को इस का भान है कि नहीं l

सुप्रीम कोर्ट को इस ज़हर और जहरीले समाज का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए l आरक्षण पूरी तरह ख़त्म कर देना चाहिए l बहुत दया आए तो आरक्षण को दलितों और पिछड़ों के ई डब्लू एस तक सीमित कर देना एक उपाय हो सकता है l नहीं जातीय और राजनीतिक दुकानदारों को जो विष बोना था बो चुके हैं l फ़सल कटने को तैयार है l

ग़नीमत है कि सवर्ण समाज संयम से काम ले रहा है l नहीं आरक्षणधारी तो जिन्ना के डायरेक्ट एक्शन के लिए पूरी तरह तैयार हैं l देश एक ख़तरनाक मोड़ पर खड़ा है l हिंदू , मुसलमान से भी बड़ी आपदा सामने उपस्थित है l

No comments:

Post a Comment