दयानंद पांडेय
पाकिस्तान में कुछ जगहों के नाम बदलने पर हमारे कुछ सेक्युलर टाइप के हिप्पोक्रेट दोस्त फ़िदा हो गए हैं l यह गिरे हुए दोगले लोग दो एक हिंदी नाम पर लहालोट हो गए हैं l यही काम कभी कभार भारत में होता है तो इन के पृष्ठ भाग में दर्द बहुत होता है l फिर यह कमज़र्फ़ अपनी दोगलई में भूल जा रहे है कि पाकिस्तान में हिंदू आबादी साफ़ हो गई है l सफ़ाचट l बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचार पर यही लोग लब सिले हुए थे l सांस नहीं ले रहे थे l
एक समाजवादी लेकिन अब कांग्रेसी मित्र की ऐसी ही एक पोस्ट पर उन की इस मानसिकता को नंगा करते एक कमेंट लिखा और उन्हें बताया कि लोहिया की आत्मा कलप रही होगी l मित्र को जिन्ना का डायरेक्ट एक्शन याद दिलाया था l बताया था कि खुशवंत सिंह का ए ट्रेन टू पाकिस्तान पढ़िए l यह भी कि खुशवंत सिंह , संघी या भाजपाई नहीं थे l भीष्म साहनी कम्युनिस्ट थे l भीष्म साहनी का तमस पढ़ने की सलाह दी थी l मित्र को जवाब देते नहीं बना l वैसे भी कभी जवाब नहीं दे पाते l क्यों कि तर्क और तथ्य से सर्वदा च्युत रहते हैं l
लेकिन आज अभी थोड़ी देर पहले का वह कमेंट , मित्र बर्दाश्त नहीं कर पाए , मिटा दिया l ग़ज़ब समाजवादी चरित्र है l क्या कांग्रेस में जाते ही आदमी राहुल गांधी की तरह फ़ासिस्ट हो जाता है ? एकतरफ़ा बात करने की बीमारी घेर लेती है ? सच को स्वीकार करने की क्षमता नष्ट हो जाती है ?
जो भी हो बंगाल का ग़म दूर करने के लिए मरियम का यह मरहम भी बहुत है l बाक़ी योगी का काढ़ा भी आ गया है l जिस को जो लेना हो सहर्ष ले !

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