दयानंद पांडेय
आप का क्या है , अलहदादपुर को अल्लाहदादपुर बता देते हैं l कान इधर से पकड़िए या उधर से पकड़ना कान ही है l इस्लाम और मुस्लिम लीग के वफ़ादार हैं आप , देश के नहीं l आप की सारी उदारता दिखावटी है l ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान बनाने के लिए सब से ज़्यादा सक्रिय उत्तर प्रदेश और बिहार के मुस्लिम लोग थे l पर जब पाकिस्तान जाने की बात हुई तो यहीं से लोग नहीं गए l जो मुट्ठी भर लोग गए भी पाकिस्तान से लात खा कर लौट आए l पर जीते एक और पाकिस्तान बनाने के लिए ही हैं l काफ़िर का कांसेप्ट है कि जाता ही नहीं l पूरी दुनिया को इस्लाम में कंवर्ट करने का ज़ज़्बा बड़ी नफ़ासत से क़ायम है l सिर तन से जुदा करने की तमन्ना है कि जाती ही नहीं l क्या पढ़े लिखे , क्या अनपढ़ l सब की एक गति है l
के आसिफ़ बहुत बड़े निर्देशक थे l कमाल अमरोही उन के सह लेखक l दोनों बहुत पढ़े लिखे और जीनियस थे l पर पूरी ज़िंदगी इस्लाम की ख़िदमत में ही लगे रहे l मनुष्यता की नहीं l मुग़ले आज़म जैसी बड़ी फ़िल्म में लेकिन मक्कारी से बाज नहीं आए l जोधा बाई नाम का एक फर्जी पात्र खड़ा किया , मान सिंह की बहन बना दिया l इतिहास में मान सिंह की कोई बहन है ही नहीं l न जोधा बाई नाम की कोई औरत , न इस नाम की कोई बेगम थी अकबर की l
और अनारकली ?
अनारकली, अकबर की एक रखैल थी l लाहौर में आज भी अनारकली की मजार है l अकबर का चेहरा साफ़ करने के लिए के आसिफ़ और कमाल अमरोही ने अनारकली को सलीम की माशूक़ा बना दिया l के आसिफ़ और कमाल अमरोही ने ऐसे कई ग़ज़ब किए हैं l बहुत प्यार और नफ़ासत से l सलीम जावेद जैसों ने के आसिफ़ और कमाल अमरोही के इस काम को और बेहतर ढंग से आगे बढ़ाया है l
अमीर ख़ुसरो और अल्लामा इक़बाल भी बहुत बड़े शायर हैं l आला दर्जे के l पर हैं यह दोनों भी अव्वल दर्जे के मक्कार और कमीने l इन की सारी शायरी इस्लाम के प्रचार के लिए ही है l मनुष्यता के लिए नहीं l अमीर ख़ुसरो तो दरबारी कवि ही था l इस्लाम के लिए तलवार और कलम दोनों हाथ में रखता था l अपने को सूफ़ी शायर बताते नहीं थकता था l पर सूफ़ी के लबादे में लीगी ही था l
अल्लामा इक़बाल भी अमीर ख़ुसरो की ही तरह था l सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा उस ने इस्लाम की ख़िदमत में लिखा है , हिंदुस्तान की ख़िदमत में नहीं l पर मूर्ख लोग बिना इसे पूरे पढ़े हिंदुस्तान का तराना मान लेते हैं l भूल जाते हैं कि पाकिस्तान का संस्थापको में से मुख्य है यह अल्लामा इक़बाल l इस्लाम का गायक l सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तान हमारा का गायक और शायर नहीं l
आप भी यह काम बखूबी अंजाम दे रहे l बड़ी नफ़ासत , बड़े एहतराम और बड़े शातिर ढंग से l दिखावटी उदारता के रैपर में लपेट कर l
कुछ ग़लत कहा हो तो ज़रूर बता दीजिए l
( अपनी ही पोस्ट पर आए एक कमेंट पर मेरा यह जवाब l )
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