दयानंद पांडेय
कितने दोमुंहे और एकपक्षीय हैं आप l तमिलनाडु में विजय जोसेफ़ के लिए कितना तो दुख है आप को l राज्यपाल के लिए कितनी घृणा l
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे रोमेश भंडारी को इतनी जल्दी भूल गए ? भाजपा तब सब से बड़ी पार्टी थी l लेकिन रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह के दावे पर भरोसा करने के बजाय राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी और राष्ट्रपति शासन लग गया l ऐसे अनेक किस्से और राज्यपाल हैं l
हरियाणा के राज्यपाल जी डी तपासे भी नहीं याद होंगे l सब से बड़ी पार्टी के नेता देवीलाल मुख्य मंत्री की शपथ के लिए राजभवन में बैठे रहे और किसी और कमरे में तपासे ने कांग्रेस के भजनलाल को शपथ दिलवा दिया l
देवीलाल ने राज भवन में ही तपासे को एक जोरदार थप्पड़ मार दिया था l कहा था , इंदिरा के इशारे पर तुम ने लोकतंत्र की हत्या कर दी है l
बिहार के राज्यपाल बूटा सिंह भी आप को नहीं याद होंगे l उन का छल भी l कितनों की याद दिलाऊं?
चुनाव हार जाने पर भी ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के ऐलान पर भी क्या लिखा आप ने ?
फिर भी अपने को पत्रकार कहने की बेशर्मी करते हैं l
धन्य हैं आप और आप की यह एकपक्षीय पत्रकारिता और आप का एजेंडा l
एजेंडा यानी दलाली l बंद भी कीजिए प्रतिपक्ष के नाम पर यह दलाली l
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इतना एकपक्षीय विचार ? विचार और दलाली में फ़र्क़ होता है l फिर तमिलनाडु के राज्यपाल ने तपासे, रोमेश भंडारी या बूटा सिंह की तरह कोई अनुचित फ़ैसला तो लिया नहीं है l सिर्फ़ बहुमत की सूची मांगी है l
( सेक्यूलरिज्म के नाम पर प्रतिपक्ष की दलाली करने वाले एक जातिवादी पत्रकार मित्र की पोस्ट पर मेरा यह कमेंट l )
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