Friday, 25 September 2026

राहुल गांधी नाम की सुलगती रस्सी

 दयानंद पांडेय


अब तो मेट्रो की बयार है l पर 1981 में जब दिल्ली में नौकरी करने लगा था तब पाया था कि डी टी सी के ज़्यादातर बस स्टैंड के आसपास पान की दुकान होती थी l उन पान की दुकानों के किनारे पर एक पतली रस्सी लगातार सुलगती रहती थी l लोग बाग उस सुलगती रस्सी से अपनी-अपनी सिगरेट सुलगाया करते थे l मुझे यह देख कर बहुत बुरा लगता था l गो कि सिगरेट तब ही पीता था , जब कोई पिलाता था l ख़ुद कभी नहीं ख़रीदता था l

बहरहाल, सुलगती रस्सी से सिगरेट सुलगाना, सिगरेट का ज़ायक़ा ख़राब करना होता था l जो लुत्फ़ और सुरूर माचिस की तीली से सिगरेट सुलगाने में था , वह किसी सुलगती रस्सी में तनिक भी नहीं था l माचिस की तीली से सिगरेट सुलगाने में लगता था जैसे ख़ुद सुलग रहे हों l नसें तड़क जाती थीं l सुलगती रस्सी से सिगरेट में यह सुरूर और सुलगन स्वाहा हो जाती थी l मुर्दों जैसी फीलिंग आती थी l भारतीय राजनीति में राहुल गांधी वही सुलगती रस्सी हैं l

सत्ता का स्वाद चखने के लिए वह ख़ुद तो निरंतर सुलगते रहते हैं l पर जिस भी मुद्दे को वह छूते हैं , मुर्दा बना देते हैं l कुछ दिनों में उस का ख़ुद ही श्राद्ध कर देते हैं l राफेल , सावरकर , ई वी एम, वोट चोरी , हाइड्रोजन बम आदि-इत्यादि से लगायत कोई एक भी मामला निर्णायक मोड़ पर वह ले गए हों तो कोई बताए भी l

चौकीदार चोर है , सावरकर जैसे मुद्दों पर शपथपूर्वक अदालत में माफ़ी मांग चुके हैं l चिल्लाते रहे , माफीवीर सावरकर नहीं हूं, राहुल गांधी हूं ! पर शपथ पूर्वक अदालत में माफ़ी मांग बैठे l फिर सावरकर का नाम ही वह भूल गए l उन की ब्रिगेड भी l मुख्य चुनाव आयुक्त मामले का भी जल्दी ही वह श्राद्ध कर कोई और मुर्दा मुद्दा उठा लेंगे , अगला श्राद्ध करने के लिए l

देखते रहिए !

जैसे कि एक न्यूज़ चैनल अपने एक शो में बाकायदा ब्लैक बोर्ड लगा कर न्यूज़ समझाता है , राहुल गांधी भी बाक़ायदा ब्लैक बोर्ड और तमाम इधर -उधर के विजुअल आदि दिखाते हुए प्रेस कांफ्रेंस कर देश को पढ़ाने का आनंद देते और लेते हैं l लेकिन कुछ कांग्रेसियों और मीडिया को छोड़ कर उन की क्लास कोई पढ़ता नहीं l वोट चोर , गद्दी छोड़ की क्लास वह पढ़ाते रहते हैं l पर कुछ कांग्रेसियों और मीडिया वालों को छोड़ कर सब उन की क्लास बंक कर जाते हैं l

रिजल्ट ख़राब हो जाता है l

अब राहुल गांधी ने स्टैंडअप कमेडियनो को भी आज़माना शुरू किया है l संदीप दीक्षित के साथ मेलोनी सीन में पिटने के बाद अब वह सेटिंग वाली माँ में भी मुँह की खा गए हैं l

हिंदी फ़िल्मों के एक बड़े अभिनेता थे राज कुमार l राहुल गांधी कई बार राजकुमार से भी प्रेरणा ले लेते हैं l कई वाक़ये हैं राजकुमार के l पर एक वाक़या सुनिए l रामायण फ़ेम रामानंद सागर एक फ़िल्म बना रहे थे , आँखें l राजकुमार को फ़िल्म का हीरो बनाना चाहते थे l समय लिया और गए राजकुमार के घर l कहानी सुनाई l राजकुमार को कहानी पसंद आ गई l पर साईन करने के पहले उन्हों ने अपने कुत्ते को अपने पास बुलाया और उस से पूछा , यह फ़िल्म कर लूं ? कुत्ते न , न में सिर हिला दिया l बड़े अफ़सोस के साथ राजकुमार , रामानंद सागर से बोले , यह तो मना कर रहा है !

रामानंद सागर चुपचाप उठ कर चले गए l बाद में धर्मेंद्र हीरो बने आँखें की और फ़िल्म सुपर हिट रही l सुनते हैं राहुल गांधी भी अपने कुत्तों और सिक्योरिटी गार्डों की सलाह से राजनीतिक सलाह लेते रहते हैं l ग़ुलाम नबी आज़ाद , हिमंत बिश्वशर्मा ने ऐसे खुलासे किए भी हैं l बाक़ी के सी वेणुगोपाल, जयराम रमेश , पवन खेड़ा आदि उन की सलाहकार मंडली भी किन स्वामी भक्त श्वानों से कम है ?

एक बड़े पत्रकार हुए हैं विनोद मेहता l बहुत सफल और प्रतिष्ठित संपादकों में शुमार हैं l लेकिन पत्रकारिता के पतन के चलते उन्हों ने अपने कुत्ते का नाम ही एडिटर रख दिया था l एक बार निजी बातचीत में मुझे उन्हों ने यह बताया था l क्या पता कहीं राहुल गांधी ने भी अपने किसी कुत्ते का नाम पी एम या एल ओ पी रख रखा हो l

आख़िर सुलगती रस्सी हैं l