Sunday, 21 June 2026

पढ़ाकू नहीं हूं , बहुत आलसी हूं , पढ़ने के मामले में अतिशय आलसी : दयानंद पांडेय

 दयानंद पांडेय से उमाशंकर तिवारी की बातचीत 


● आप एक सफल पत्रकार और हिन्दी साहित्य में हर विधा पर लेखन के लिए विख्यात हैं l इसका श्रेय किस को देते हैं ॽ

- अपने आदरणीय पाठकों को।

● सर आप के पत्रकार के कार्यकाल में आप के ऊपर अनेकों बार जानलेवा हमला हुआ l फिर भी आप साहस और आत्म विश्वास से आगे यानी लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे l इसके लिए प्रेरक किस को मानते हैं ॽ

- हां , लखनऊ में एक बार शिया सुन्नी दंगे में प्राणघातक हमला हुआ था चौक इलाक़े में। किसी तरह बच गया। प्राण घातक दुर्घटनाएं भी कई हुई l रोड एक्सीडेंट l हर बार काल के गाल से बच कर निकल आया l ख़बरों को ले कर निरंतर धमकी , कुछ मुक़दमे , कंटेंप्ट ऑफ़ कोर्ट और विधान परिषद में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव भी पेश हुए। लेकिन सभी भंवर से हर बार बेदाग निकल आया l

● आदारणीय आप पत्रकारिता क्षेत्र में रहते हुए अनेक महान हस्तियों का इंटरव्यू किया l सब से अच्छा अनुभव किस का रहा ?

- लगभग सब से ही अच्छा अनुभव रहा। जिन कुछ लोगों के साथ अनुभव ठीक नहीं रहा , उन के इंटरव्यू लिखे ही नहीं। कुछ इंटरव्यू बहुत ख़राब रहे तो उन को भी नहीं लिखा। कुछ लोग बड़े नामी थे पर उन के पास बताने को कुछ नहीं था। उन का इंटरव्यू भी नहीं लिखा। अटल से मायावती तक , दिलीप कुमार से अमिताभ बच्चन तक , श्रीदेवी से पूजा भट्ट तक, लता मंगेशकर से कुमार शानू तक , नामवर सिंह से निर्मल वर्मा तक , ब व कारंत से उषा गांगुली तक तमाम शिखर पुरुषों, स्त्रियों से इंटरव्यू किया है l अन्य अनेक लोग हैं l इंटरव्यू की एक पूरी किताब ही है l

● आप अपने प्रारंभिक जीवन अम्मा जी बाबू जी,, प्रारंभिक शिक्षा के विषय में बताइए जिस से हमारे पाठक प्रेरणा ले सकें l

- अम्मा , पिता जी सर्वदा अनुकरणीय रहे। हां , पिता जी से कई बार छत्तीस का आंकड़ा रहा। इतना कि कई बार बातचीत बंद हो गई।

● आप के पसंदीदा लेखक , मन पसंद पुस्तकें जिससे आप प्रभावित होकर लोक प्रिय लेखक बने ॽ

- बहुत सी किताबें हैं। बहुत से लेखक हैं। पर हजारी प्रसाद द्विवेदी , अज्ञेय , मोहन राकेश , खुशवंत सिंह , चतुरसेन शास्त्री , मनोहरश्याम जोशी , चंद्रकिरण सोनरिक्सा पसंदीदा हैं। जान लीजिए कि बहुत कम पढ़ा है। पढ़ाकू नहीं हूं। बहुत आलसी हूं। पढ़ने के मामले में अतिशय आलसी।

● आप अन्य क्षेत्र में जा सकते थे l फिर आपने पत्रकारिता और सफल हिंदी जगत में कालजयी सफल , कालजयी विश्वविख्यात साहित्यकारों में आप ने अपने को स्थापित कर लिया l इस सफलता का रहस्य किया है ?

- किसी और क्षेत्र में जाने लायक़ कभी नहीं रहा। जीवन में सफलता जैसी कोई चीज़ भी नहीं है। इस लिए कोई रहस्य भी नहीं है।

● आप एक दबंग , बेबाक लिखने वाले , एक अच्छे संपादक भी हैं l आप की 80 से अधिक पुस्तकें सम्मानित प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित हैं इसका श्रेय किसको दिजिएगा ॽ

- सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने आदरणीय पाठकों को।

● पाण्डेय जी नये लेखकों का समय समय पर मार्ग दर्शन देते रहे हैं l यही नहीं आप एक अच्छे वक्ता समीक्षक हैं l फिर आप के विरोधी हैं l इस संदर्भ में क्या संदेश देना चाहेंगे ॽ

- मार्गदर्शन जैसा कुछ नहीं है। बहुत सामान्य आदमी हूं। वक्ता भी बहुत सामान्य हूं। बस बोल बतिया लेता हूं। हां , सच-सच लिखने और बोलने के कारण विरोधी बहुत हैं हमारे। ठकुरसुहाती नहीं आती।

● आप का जन्म स्थान गोरखपुर है l आप अपने जन्मस्थान गांव-जवार के कुछ अनुभवों का साझा किजिए l आप के अनुभवों का लाभ हमारे पाठक भी उठा सकें ॽ

- जन्म स्थान सभी को बहुत प्रिय होता है। मुझे भी है। गांव जवार के खट्टे मीठे अनुभव बहुत हैं। बताएंगे तो पूरी किताब लिख जाएगी।

● आप को आप के साहित्य की साधना को देखते हुए आप की पुस्तकों पर अनेक सम्मान मिले हैं l उत्तरप्रदेश हिंन्दी संस्थान अन्य प्रदेशों ने पुरस्कृत किया है l आप को लोहिया साहित्य सम्मान , साहित्य भूषण, हिंदी गौरव ,अन्य विभिन्न पुरस्कार सम्मान मिलने के बाद भी साहित्य सेवा में सक्रिय और विनम्र सरल स्वभाव कैसे बना रखा है l आप क्या कहना चाहेंगे ॽ

- बहुत सामान्य आदमी हूं। सामान्य जीवन जीता हूं। कोई चकाचौंध नहीं है। सम्मान वग़ैरह मिलने से सभी को ख़ुशी मिलती है। मुझे भी ख़ुशी होती है। अच्छा लगता है।

● आप ने अपने जीवन में अनेकों बार परमात्मा की कृपा से आप के प्राण की रक्षा की इस परम सत्ता को आप इस अध्यात्म शक्ति के विषय में कुछ प्रकाश डालिए l

-हां , कुछ दुर्घटनाओं का शिकार हुआ। कई बार। हर बार मृत्यु के जबड़े से लौट कर आया। यह मेरा सौभाग्य है। आध्यात्मिक व्यक्ति नहीं हूं। मोह-माया , लोभ में फंसा हुआ सामान्य व्यक्ति हूं।

●लखनऊ के साहित्यकार जैसे नागर , भगवती चरण वर्मा, यशपाल जैसे कवि, उपन्यासकार, कहानीकार,,,,, पत्रकार, संपादक, रंगमंच, कलाकारों से आप प्रभावित हुए l कुछ संस्मरण साझा किजिए l

- मेरा सौभाग्य है कि इन लेखकों का मुझ पर बहुत स्नेह रहा। ख़ास कर नागर जी का तो बहुत।

● आप की पुस्तकें लखनऊ में ही नहीं विदेशों में भी पढ़ी जातीं हैं l जब कि आपकी पुस्तकें सुप्रसिद्ध प्रकाशक प्रकाशित करते हैं और लोकार्पण भी नहीं कराते हैं l आप का इस संदर्भ में मार्गदर्शन दीजिए l .

- मेरा काम सिर्फ़ लिखना है। और कुछ नहीं आता। लोकार्पण वग़ैरह का इवेंट मेरे वश का नहीं है। बाक़ी किताब बेचना प्रकाशक का काम है। कहां बेचता है , प्रकाशक ही जाने।

● क्या आप ज्योतिष, अध्यात्म ,पर आस्था रखते हैं ?

- आस्था है। पर मुझे ज्योतिष नहीं आती। आध्यात्मिक भी नहीं हूं।

● आप के साहित्य सृजन में आप की धर्मपत्नी, सुपुत्र, सुपुत्री का योगदान है ?

- सभी का योगदान है। पत्नी का बहुत। पत्नी अगर घर में शांति , सुख और सुविधा न दें तो कुछ लिखने का सोचना भी कठिन होता। बहुत कठिन।

● नये लेखकों को कैसा साहित्य सृजन की आवश्यकता हैॽ

- नए लेखक बहुत होशियार , बहुत जानकर लोग हैं। उन के आगे हमारे जैसे लोग कुछ नहीं हैं।

● आप ने पत्रकारिता और साहित्य सेवा ही क्यों अपनाया? आप आइ ए एस, पी सी एस, और आई पी एस भी बन सकते थे l भगवान की कृपा से आप का रोबीला चेहरा ज्ञान गुण प्राप्त है l फिर देश के लिए समाज के लिए साहित्य जगत में फिर भी विश्व विख्यात हैं l ऐसा क्यों ?

- शायद पत्रकारिता और लेखन के लिए भगवान ने तय किया था। आई ए एस , पी सी एस के लायक़ नहीं था। न पढ़ाई में तेज़ था। न मेहनती। कभी इस बार में सोचा भी नहीं। आलसी भी बहुत हूं। एक नंबर का निकम्मा।

● पाण्डेय जी , आप की सर्वप्रथम कहानी ,उपन्यास कब प्रकाशित हुआ ॽ

- विद्यार्थी जीवन में ही रचनाएं छपने लगी थीं। पारिश्रमिक मिलने लगा था। तब के समय अख़बार , पत्रिकाएं , आकाशवाणी सभी पारिश्रमिक देते थे। मेरा पहला उपन्यास पचीस बरस की उम्र में छप गया था। कहानी संग्रह बाद में छपा। कई बार एक ही साथ दो तीन किताब एक साथ छप कर मिलीं।

● आप की कालजयी पुस्तक कुछ बातें , कुछ मुलाकातें से हमें बहुत कुछ सीखने का अवसर प्राप्त हुआ l बहुत अच्छे कालजयी लोकगीत गायक,फिल्मी कलाकार, शारदा सिन्हा,जी, लोकगीत और लोकगायक बालेश्वर जी जैसे अनेकों कालजयी महान विभूतियों का साक्षात्कार लिया है इस कालजयी पुस्तक प्रस्तुत करने की प्रेरणा किस से मिली ॽ

- अख़बार में रिपोर्टर था। तो इंटरव्यू लेना भी हमारे काम का हिस्सा था। होता गया।

● आदारणीय पाण्डेय जी आप ने अपने व्यस्तताओं में से बात करने के लिए वार्तालाप के लिए बहुत-बहुत आभार !