दयानंद पांडेय
सच तो यह है कि देश अब नरेंद्र मोदी को सत्ता से उखाड़ फेंकना चाहता है l सत्ता से बेदखल कर देना चाहता है l कम से कम भाजपा का कोर वोटर सवर्ण तो इस मोदी सरकार को नेस्तनाबूद कर देना चाहता है l आजिज आ गया है l
पर यह जो एक राहुल गांधी नाम का बेहूदा , फ्रस्ट्रेटेड, अराजक , ग़ैर राजनीतिक , अलोकतांत्रिक, सामंती व्यक्ति है, हर बार बीच में आ कर खड़ा हो जाता है l मोदी सरकार को बचा लेता है l निरंतर बचाता रहता है l लोग मोदी का विकल्प चाहते हैं , लेकिन राहुल गांधी तो हरगिज-हरगिज नहीं l ऐसी राजनीतिक विकल्पहीनता देश , पहली बार भुगत रहा है l
दरअसल राहुल गांधी, कलयुग का दुर्योधन हैं l बल्कि दुर्योधन और तुग़लक़ का मिलाजुला कोलाज हैं l
दुर्योधन की यह बात बिल्कुल सही थी , जायज थी कि अगर उस का पिता नेत्रहीन था , तो इस में उस का क्या दोष ? लेकिन दुर्योधन की बात जायज होते हुए भी उस के सारे तौर-तरीक़े नाजायज थे l द्रौपदी के चीर हरण से लगायत लाक्षागृह तक के l राहुल गांधी के भी बात करने का तरीका , अप्रोच, सोच सभी कुछ नाजायज होते हैं l तू-तकार और धत्त तेरी की लत्त तेरी की भाषा और ज़्यादा घातक है l तुग़लक़ भी कभी स्थिर नहीं रहता था l चमड़े का सिक्का , दिल्ली से दौलताबाद वाली हालत है l तुग़लक़ यह सब अपनी शासकीय अक्षमता छुपाने के लिए करता था l राहुल गांधी भी यही निरंतर करते रहते हैं l अपनी अक्षमता छुपाते हुए , तुग़लकी फ़ैसले करते रहते हैं l
संसद न चलने देना जैसे तमाम अभद्र तरीक़े , गुंडई, अभद्र और अराजक भाषा राहुल गांधी को गुंडा बना कर प्रस्तुत करते हैं l लतीफ़ा गांधी का रूप भी , हल्का बना देता है l राहुल गांधी को लगता है कि भारत की सत्ता उन की बपौती है l जो कि नहीं है l राहुल गांधी की हर प्रेस कांफ्रेंस पानी का बुलबुला बन जाती है l हाइड्रोजन बम, एटम बम आदि की बेवक़ूफ़ी भरी बातें l
आज की प्रेस कांफ्रेंस भी ऐसी ही बेतुकी थी l मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश से लाख असहमति , मतभेद हो सकते हैं पर देशद्रोही कहना , निरी मूर्खता है l ज्ञानेश के देश के प्रति अवदान को वह नहीं जानते l संसद में बोलना होता नहीं l कभी ग़लती से बोल भी देते हैं तो क्या बोलते हैं , वही जानते हैं या फिर कुछ चुने हुए कांग्रेसी l
अभी राहुल गांधी ने कांग्रेस को डुबोया है , सत्ता हाथ में आते ही देश को डुबोने में इसे दो दिन का भी समय बहुत ज़्यादा है l देश डुबो देगा l