Friday, 2 October 2026

कुतर्क की कुत्तागिरी की कोई हद नहीं

दयानंद पांडेय


वह कौन कृतघ्न और घृणित लोग हैं जिन्हों ने स्मित मच्छार के साहस और शौर्य को सैल्यूट नहीं किया l सैल्यूट ? अरे इस घटना की नोटिस तक नहीं ली l सिर्फ़ इस लिए कि हमलावर को-पायलट मुस्लिम जेहादी था l किसी मुस्लिम संगठन , ओवैसी आदि तो छोड़िए, कांग्रेस , सपा जैसी सभी सेक्यूलर सूरमा पार्टियां भी इस बाबत कब्रिस्तान जैसी ख़ामोशी अख़्तियार किए बैठी हैं l

ऐसे जैसे कुछ घटा ही न हो l और तो और कुछ श्वान तो स्मित मच्छार की मजम्मत में भी उपस्थित हो गए हैं l पूछ रहे हैं कि नेतन्याहू को कैसे यह सब पता चल गया ? और तो और मोदी ने बिना सोचे समझे कैसे नेतन्याहू को आँख बंद कर फालो कर लिया ? अजब-ग़ज़ब सवाल हैं इन श्वानों के l

स्मित मच्छार का दोष सिर्फ़ इतना है कि एक तो वह हिंदू है , तिस पर ब्राह्मण l गुजराती भी l हनुमान चालीसा पढ़ने की बात बताई है उस कठिन घड़ी में , स्मित मच्छार ने l हनुमान चालीसा की ताक़त का बखान किया है स्मित ने l भगवत गीता की बात की l यह सब कहां बर्दाश्त होगा इन अभागों को l फिर ओमान के उस जेहादी को-पायलट के प्लान को क्यों नाकाम कर दिया l कुतर्क की कुत्तागिरी की कोई हद नहीं है l स्मित मच्छार ने अपनी जान पर खेल कर कैसे इतने सारे लोगों को बचा लिया , सारे भौंकते हुए सवाल इसी पर है l या फिर ख़ामोशी !

अल्ला हो अकबर ! का नारा उस ओमान के जेहादी को-पायलट ने ही नहीं , यह सारे कृतघ्न और घृणित लोग भी लगा रहे हैं l बस शब्द बदल गए हैं l भाव और जेहाद वही हैं l