Thursday, 29 October 2026

एक कट्ठा ज़मीन में पचास बीघा पुदीना

दयानंद पांडेय 

क्षमता 50 हज़ार की भी नहीं , दावा दस लाख का। ग़ज़ब भेड़चाल मची हुई है। मन करता है एक नया मुहावरा रच दूं। बिलकुल नया। एक कट्ठा ज़मीन में पचास बीघा पुदीना बोना। दिल्ली के रामलीला मैदान में 50 हज़ार लोग भी एक साथ नहीं बैठ सकते। लेकिन राहुल गांधी , उन की कांग्रेस और इंडी गठबंधन हुंकार भर रही है कि दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर , 2026 को दस लाख लोग इकट्ठा होंगे। कैसे होंगे दस लाख लोग वहां इकट्ठा ? और कहां और कैसे बैठेंगे ? यह पूछने और बताने वाला कोई नहीं है। न इंडी और कांग्रेस के विरोधी लोग , न मीडिया के लोग। भाजपा भी यह पूछने का साहस नहीं कर पा रही। भाजपा तो इस रैली को सिख विरोधी बताने की मनहूस कवायद में व्यस्त है। जब कि दिल्ली के सिख इस बाबत भाजपा की ऐसी-तैसी किए हुए हैं। इस बिंदु पर भाजपा को अपना हमदर्द नहीं मान पा रहे दिल्ली के सिख। 

क्यों नहीं इकट्ठा हो सकते रामलीला मैदान में दस लाख लोग ? सच तो यह है कि दावा कोई कहीं भी जितने की कर ले पर दिल्ली , मुंबई , कोलकाता सहित दुनिया भर में कहीं कोई ऐसा पार्क या मैदान अभी तक नहीं है जहां एक लाख या दो लाख लोग एक साथ इकट्ठा हो सकें। 

तथ्य देखिए। 

दिल्ली के रामलीला मैदान का कुल क्षेत्रफल लगभग 12 एकड़ है। एक एकड़ में 43 , 560 वर्गफीट होता है। तो 12 एकड़ में हुआ  5 , 22 , 720 वर्गफुट। यानी  5 , 22 , 720 स्क्वायर फ़ीट मान लीजिए। दिल्ली के रामलीला मैदान का यह औपचारिक क्षेत्रफल का हिसाब है। एक आदमी को कुर्सी पर बैठने के लिए 10 से 15 वर्गफीट जगह चाहिए। बहुत सट कर पालथी मार कर बैठने के लिए 5  वर्गफीट जगह चाहिए। इतनी बड़ी रैली में कोई पालथी मार कर अब के समय में बैठने से रहा। फिर भी अगर सभी लोग पालथी मार कर सट कर बैठें तो इस क्षेत्रफल में कुल 1, 04, 544 लोग बैठ सकते हैं 5 , 22 , 720 वर्गफुट जगह में। कुर्सी पर बैठेंगे तो इस संख्या के आधा लोग भी नहीं बैठ सकते। फिर रैली के लिए मंच , रास्ता , सुरक्षा व्यवस्था भी होगी ही। कुछ प्रमुख लोगों की कार पार्किंग भी होगी। 

तो कुल क्षेत्रफल का 30 प्रतिशत तो इस मद में निकल जाएगा। घनी भीड़ में भगदड़ की भी बहुत संभावना रहती है। इस की व्यवस्था भी करनी होगी कि भगदड़ न हो। कुछ अस्थाई बाथरूम भी होंगे। तो कोई कांग्रेसी , कोई राहुल गांधी , कोई इंडी गठबंधन का महारथी , कार्यकर्ता बताएगा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में दस लाख लोग कैसे और कहां से समाएंगे ? 

लखनऊ में एक बेगम हज़रत महल पार्क है। तीन चार दशक पहले राजनीतिक रैलियां यहीं होती थीं। बेगम हज़रत महल पार्क में पांच हज़ार भीड़ भी कभी नहीं इकट्ठा हो सकती। आसपास की सारी सड़कों और इमारतों को भी अगर बेगम हज़रत महल पार्क में जोड़ लिया जाए तो हद से हद दो से तीन हज़ार लोग खड़े हो सकते हैं। कई बार पार्क ठीक से नहीं भरा होता तो भी किसी भी राजनीतिक पार्टी की रैली का दावा पांच लाख से कम का नहीं होता था। मुलायम सिंह यादव जब मुख्य मंत्री थे तब अपनी रैलियों की फ़ोटो , राजकीय हेलीकाप्टर से हवाई शॉट लेने के निर्देश दिए रहते थे और सूचना विभाग द्वारा जारी वही फोटो अख़बारों में छपती थी। पांच लाख ? कभी-कभार दस लाख की भी भीड़ बता दी गई। अख़बारों में यह दावा छपा भी। लखनऊ में मायावती सरकार द्वारा बनवाया गया रमा देवी पार्क ही एक ऐसा पार्क है जहां पचास या पचहत्तर हज़ार तक लोग एक साथ इकट्ठा हो सकते हैं। लेकिन बसपा के अलावा किसी और राजनीतिक पार्टी की कभी हिम्मत नहीं हुई यहां कोई रैली करने की। क्यों कि इतना बड़ा मैदान भरने की किसी पार्टी की हैसियत नहीं रही। और अब तो मायावती की भी हैसियत नहीं है यहां रैली करने की। 

मनमोहन सिंह की यू पी ए सरकार के समय जब अन्ना आंदोलन हुआ था तब के ही दिनों अन्ना के लोगों से कुछ मतभेद होने के बाद स्वामी रामदेव ने हुंकार भरी थी कि एक करोड़ से कम लोगों की रैली मैं करता ही नहीं। फिर दिल्ली के इसी रामलीला मैदान में रामदेव ने एक करोड़ लोगों की रैली करने का दम भरा। अलग बात है कि जब दिल्ली पुलिस ने आधी रात सख़्ती की और धर पकड़ शुरू की तो रामदेव औरतों का सलवार , सूट पहन कर औरतों के बीच छुप गए। अपने लंबे केश फैला लिए। फिर भी मनमोहन सरकार के समय की दिल्ली पुलिस ने रामदेव को सलवार सूट में गिरफ्तार कर जहाज में बिठा कर दिल्ली से देहरादून भेज दिया। रामदेव देहरादून एयरपोर्ट पर जब सुबह-सुबह उतरे तब इसी सलवार सूट में मीडिया के कैमरे में क़ैद हो गए। तब के दिनों रामदेव का एक नया नामकरण हुआ था , सलवारी बाबा। तो पता नहीं क्यों राहुल गांधी और उन के लोग दस लाख की भीड़ पर ही रुक गए हैं। रामदेव से प्रेरणा ले कर वह दो करोड़ की भीड़ का दावा भी कर सकते थे। कर देना चाहिए। कार्यकर्ताओं और छुटभैया नेताओं का सुरूर बना रहेगा। 

और देखिए कि अमर सिंह याद आ गए हैं। 

उत्तर प्रदेश में तब के समय मायावती मुख्य मंत्री थीं। समाजवादी पार्टी ने मायावती सरकार के खिलाफ ज़िला-ज़िला जेल भरो आंदोलन शुरू किया था। आज़मगढ़ अमर सिंह का गृह जनपद है। आज़मगढ़ में अमर सिंह ने जेल भरो आंदोलन का नेतृत्व किया। आज़मगढ़ शहर से कोई दस-बारह किलोमीटर दूर एक कालेज में उन का हेलीकाप्टर सुबह आठ बजे के करीब उतरा। लखनऊ से आए थे। हम भी कवरेज के लिए साथ थे। औपचारिक जलपान के बाद अमर सिंह एक खुली जीप पर हाथ जोड़ कर सवार हुए। पहले से बटोरे हुए बमुश्किल पचास लोग साथ पैदल चले। कोई पंद्रह-बीस कार , जीप , मोटर साईकिल भी। 

आज़मगढ़ शहर आते-आते दस , साढ़े दस बज गए। आफिस और स्कूल की भीड़ सड़कों पर थी। जुलूस की भीड़ में यह भीड़ भी शुमार हो गई। छोटे से शहर आज़मगढ़ में भी जगह-जगह जाम लग गया। अमर सिंह के इशारे पर फोटोग्राफरों ने खुली जीप पर खड़े अमर सिंह को इस भीड़ के साथ कैप्चर किया। विभिन्न नारों के साथ जुलूस कलक्ट्रेट के भीतर पहुंचा। बरगद के एक पेड़ के नीचे बने छोटे से चबूतरे पर थोड़ी देर भाषण , भूषण हुआ। मायावती सरकार के ज़ुल्म , भ्रष्टाचार , अकलियत आदि की चर्चा के साथ मायावती सरकार को उखाड़ फेकने की हुंकार भरी गई। अमर सिंह के भाषण समाप्ति के बाद एक अपर जिलाधिकारी आए। औपचारिक ज्ञापन लिया और वहां उपस्थित लोगों की गिरफ्तारी और रिहाई का एक साथ ऐलान किया। अपर जिलाधिकारी ने दो सौ लोगों की गिरफ्तारी का ऐलान किया। 

अलग बात है कि उस परिसर में सौ लोग भी खड़े नहीं हो सकते थे। फिर भी अमर सिंह अपर जिलाधकारी पर बिदक गए। गुस्से से तमतमा गए। अमर सिंह ने माइक पर चीखते हुए कहा कि यहां दो हज़ार से अधिक लोग इकट्ठा हैं और तुम सिर्फ दो सौ बता रहे हो ? मायावती सरकार की यह तानाशाही हम नहीं चलने देंगे। हमारी सरकार बनी तो तुम को देख लेंगे। आदि-इत्यादि ! अपर जिलाधकारी अमर सिंह के आगे हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया। मायावती मुर्दाबाद के नारे शुरू हो गए। अपर जिलाधिकारी ने अपनी बात को संशोधित करते हुए कहा कि पांच सौ लोग गिरफ्तार किए गए और रिहा किए गए। 

अमर सिंह फिर भी नाराज रहे। किसी बिगड़ैल सांड़ की तरह फुफकार भरते हुए। 

बिचारा अपर जिलाधिकारी हाथ जोड़े फौरन एक हज़ार की संख्या की घोषणा पर आ गया। अमर सिंह आग्नेय नेत्रों से उसे देखते रहे। फिर अपर जिलाधिकारी बिना देरी किए अमर सिंह द्वारा बताए गए दो हज़ार की संख्या पर आ गया। अमर सिंह बोले , यही बात माइक पर कहो। अब अपर जिलाधिकारी भी तमतमा गया। जुड़े हाथ उस के खुल गए। माइक पर आया और बड़े तैश में बोला , दो हज़ार लोग गिरफ्तार किए जाते हैं और तुरंत रिहा किए जाते हैं। यह कह कर उस ने अमर सिंह से फिर हाथ जोड़े और बिजली की तेज़ी से वहां से निकल गया। अमर सिंह ज़िंदाबाद के नारे गूंजने लगे। कलक्ट्रेट के बगल में ही पुलिस लाइन थी। हेलीकाप्टर , गांव के कालेज से उड़ कर पुलिस लाइन के हेलीपैड पर आ कर खड़ा था। अमर सिंह हेलीकाप्टर पर बैठे और हम लोग लखनऊ के लिए उड़ चले। 

अब राहुल गांधी भी ऐसे ही हेलीकाप्टर पर उड़ चले हैं।