दयानंद पांडेय
सामाजिक समता के नाम पर चल रहे पाखंड और कमीनेपन को, झूठी बातों को , कुतर्क को ग़लत साबित करने की मूर्खता आप कीजिए l मैं परीक्षार्थी नहीं हूं l आप को जिन बातों को ग़लत सही साबित करना हो कीजिए l
अपना एजेंडा , अपना ट्रैप अपने पास रखिए l मैं जो भी कुछ लिखता हूं तथ्य और तर्क के साथ लिखता हूं l मुझे मालूम है कि मेरा गंतव्य क्या है l रास्ते में कई सारे कुत्ते अकारण भौंकते हुए दौड़ते रहते हैं , उन सभी को चुप कराना हमारा काम नहीं है l
आप कीजिए l किसी ने रोका ?
आप अपने सच , अपने आरक्षण की बैसाखी के साथ रहिए न ! हम आरक्षण की इसी बैसाखी को तोड़ देना चाहते हैं l हमारा सीधा लक्ष्य यही है l आप अपनी बैसाखी बचाइए l
हम स्वस्थ और सामाजिक समता वाला समाज बनाना चाहते हैं l माइनस चालीस वाला डाक्टर किसी सूरत मंज़ूर नहीं है l
ठीक ?
90 और 99 प्रतिशत वाला किनारे हो जाए और माइनस चालीस वाला सिर पर आग मूते l यह तो नहीं चलेगा l अस्सी साल बहुत होते हैं किसी को आग मूतने के लिए l
अब और नहीं l
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मतलब आरक्षण की भीख में माइनस चालीस वाला डाक्टर बनोगे और आग भी मूतोगे ? पांडव से मुकाबला करोगे , आरक्षण की बैसाखी से ? यह बैसाखी अब तोड़ देंगे l समय की प्रतीक्षा करो l कौरव हो , पांडव बनने का अभिनय कर के बैसाखी नहीं बचेगी l अस्सी साल हो गए बैसाखी पर लंगड़ाते हुए l शर्म नहीं आती कि अभी तक खड़े नहीं हो सके l
( अपनी पोस्ट पर आए एक कमेंट पर मेरा यह जवाब l )
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