Saturday, 6 February 2016

वह दलित हैं वह सेक्यूलर हैं पर ज़िद ऐसे करते हैं जैसे छोटे बच्चे हैं

फ़ोटो : सुलोचना वर्मा

ग़ज़ल 

देश और समाज की ऐसी तैसी उन के लिए तयशुदा एजेंडे ही अच्छे हैं
वह दलित हैं वह सेक्यूलर हैं पर ज़िद ऐसे करते हैं जैसे छोटे बच्चे हैं

उन की चुनी हुई चुप्पियां चुने हुए विरोध उन को कैंसर की तरह जकड़े हैं
नकली माहौल बनाने में बहुत माहिर हैं  ज़मीन पर लेकिन बहुत कच्चे हैं

देश को ब्लैकमेल करते रहना उन का स्थाई एजेंडा वह डिग नहीं सकते
वह जानते हैं राजनीतिक पार्टियों का दोगलापन सो मनबढ़ई में पक्के हैं

आतंकवाद कश्मीरी पंडितों का शरणार्थी होना उन के लिए बेमतलब मुद्दे हैं
अफ़जल कसाब इन के हीरो सारी दुनिया झूठी है बस यही एक एक सच्चे हैं 

उन की अकड़ उन का अहंकार उन का व्यवहार उन्हें तोड़-तोड़ देता है
पर लुक ऐसे देते हैं गोया सारे लोग मूर्ख हैं वह पके ईंट की तरह  पक्के हैं

जहर उगलने और माऊथ कमिश्नरी में अव्वल कभी कोई जवाब नहीं रहा
कुतर्क उन की थाती जो लोग उन से असहमत हों वह सभी संघी हैं लुच्चे हैं

आत्महत्या कर के दुनिया को हिला देने की कूवत रखते हैं आप उन से डरिए 
नहीं समूचे देश में आग लगा देंगे वह अपने कायराना इरादे के बहुत पक्के हैं 

समाज को जोड़ना नहीं तोड़ना हर हाल मक़सद मिशनरियों का चंदा ज़रूरी है
बाक़ी सारे मसले भाड़ में जाएं दाग हैं तो रहें उन के लिए यह दाग बहुत अच्छे हैं

मंदिर का विरोध और मंदिर में प्रवेश का संघर्ष एक सांस में करने की सीनाजोरी
फासिज़्म की कोई हद होती नहीं कोई आईना दिखाए कैसे यह  सावन के अंधे हैं


[ 7 फ़रवरी , 2016 ]


1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (08-02-2016) को "आयेंगे ऋतुराज बसंत" (चर्चा अंक-2246) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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