Monday, 26 June 2017

बोनसाई बरगद



गमले के बोनसाई भी 
अपने को जब सचमुच का बरगद समझ कर 
बोलने लगते हैं तो कितने हास्यास्पद हो जाते हैं , 
कितने तो बौने दीखते हैं , 
वह बरगद होने के गुरुर में समझ नहीं पाते । 
समझ नहीं पाते कि 
आफ्टरआल वह बोनसाई हैं , बोनसाई ही रहेंगे ।

Tuesday, 20 June 2017

उन का सुख

 
पेंटिंग : बी प्रभा
 
बहुतायत लोगों की हर खुशी में
गिनती के कुछ लोग
दुःख खोज लेने के लिए अभिशप्त हैं । 
 
गज़ब यह कि वह यह भी चाहते हैं
कि उन के दुःख में 
सभी लोग दुखी हो जाएं । 
 
यही उन का सुख है ।