Tuesday, 23 February 2016

तुम्हारे साथ बहते हुए रहना चाहता हूं

फ़ोटो : अनिल रिसाल सिंह


ग़ज़ल

मुझे तैरना नहीं आता बहना जानता हूं
तुम्हारे साथ बहते हुए रहना चाहता हूं

किसी जोगी की तरह तुम्हें साथ ले कर
इस नगर से उस नगर घूमना चाहता हूं 

रमता जोगी बहता पानी कबीर कहते 
प्यार की इसी धार में बहना चाहता हूं

फागुन की मस्त दस्तक है और तुम हो 
सुर में सुर मिला फगुआ गाना चाहता हूं

समंदर आकाश दूर से मिलते दीखते हैं 
चंदन पानी की तरह मिलना चाहता हूं

[ 23 फ़रवरी , 2016 ]

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