Wednesday, 26 August 2026

यह झूठ है कि अंबेडकर द्वारा दिया गया पानी मदन मोहन मालवीय ने नहीं पिया

दयानंद पांडेय 

मदन मोहन मालवीय अपनी घृणा में लथपथ कितना तो कम जानते हैं आप मदन मोहन मालवीय के बारे में l जानते तो रमेश भाटी के इस विष में अपना विष भी न मिलाते l आप हाला कि सब जानते हैं पर अपने एजेंडे में इतना व्यस्त , न्यस्त और त्रस्त हो चुके हैं कि तथ्य से आप का अब कुछ लेना देना नहीं रह गया है l कान के लिए कौए के पीछे भागने की लत लग गई है आप को l 

मदन मोहन मालवीय और अंबेडकर की उम्र का फर्क जानते हैं ? मदन मोहन मालवीय और गांधी की उम्र का फर्क जानते हैं ? मदन मोहन मालवीय इन दोनों से न सिर्फ़ उम्र में बड़े हैं , काम में भी बहुत बड़े हैं l बस प्रचार के दुकानदार नहीं हैं l जब गांधी और अंबेडकर परिदृश्य में भी नहीं थे तब मदन मोहन मालवीय ने कलकत्ते से अछूतोद्धार आंदोलन शुरू किया था और बहुत सफल रहा था l प्रोफ़ेसर मुकुट बिहारी द्वारा लिखित मदन मोहन मालवीय की जीवनी कभी पढ़िए l मालवीय जी के तमाम काम आप को मालूम हो जाएंगे l 

एक वाक़या है बाबू जगजीवनराम का l जगजीवनराम बी एच यू में पढ़ते थे l हॉस्टल में रहते थे l मदन मोहन मालवीय को मालूम हुआ कि जगजीवन राम मेस में नहीं खाते l उन की थाली भी अलग है l उन का भोजन उन के कमरे में दे दिया जाता है l मदन मोहन मालवीय एक दिन भोजन के समय हॉस्टल आए l जगजीवन राम को उन के कमरे से लिवा कर मेस में आए l उन के साथ बगल में बैठ कर न सिर्फ़ भोजन किया बल्कि सब को साथ बिठाया l सब ने साथ भोजन किया l फिर मदन मोहन मालवीय ने जगजीवन राम की थाली भी ख़ुद धोई l 

दूसरे दिन से जगजीवन राम मेस में सब के साथ सामान्य ढंग से भोजन करने लगे l माहौल बदल गया था। ऐसे अनेक काम हैं दलित उद्धार और छुआछूत के ख़िलाफ़ मदन मोहन मालवीय के l और आप का प्रिय भाटी बता रहा है कि आंबेडकर का दिया पानी नहीं पिया मालवीय ने और इस बेसिर पांव की बात को ले कर आप अपनी घृणा में ले कर उछल पड़े हैं। 

रमेश भाटी तो जहरीला और अनपढ़ आदमी है पर आप को अभी तक पढ़ा लिखा आदमी मानने के लिए मेरा विवेक कहता है l फिर भी बड़े सम्मान और आदर के साथ आप को चुनौती दे कर पूछता हूं कि अंबेडकर द्वारा दिया गया पानी मदन मोहन मालवीय ने पीने से इंकार कर दिया , इस का कोई प्रामाणिक आधार है , आप के पास तो कृपया उपस्थित कीजिए l जानता हूं, आप अपने एजेंडे के तहत ऐसा नहीं कर सकेंगे l इस लिए भी नहीं कर सकेंगे कि इस का कोई आधार या प्रमाण नहीं है दुनिया में l अपने एजेंडे के जहर के प्रभाव में इस कमेंट की नोटिस नहीं लेंगे। इस लिए भी कि लोकतंत्र और संवाद में अब आप का यकीन नहीं रहा। सिर्फ अपनी गोलबंदी के कुएं में ही आप कैद हो कर रह गए हैं। फासिज्म की इंतिहा है यह। 

आप नहीं जानते और स्वीकारते तो यह एक तथ्य और जान लीजिए कि मदन मोहन मालवीय महात्मा गांधी के मेंटर थे l गांधी ने यह ख़ुद स्वीकार किया है l गांधी वांगमय में संकलित चिट्ठियों में लिखा है , गांधी ने l स्वदेशी आंदोलन और हरिजन प्रेम गांधी ने मदन मोहन मालवीय से सीखा l स्वदेशी आंदोलन के जनक हैं मदन मोहन मालवीय l उस समय न सिर्फ़ स्वदेशी आंदोलन शुरू किया मालवीय ने बल्कि मुकदमा कर अंग्रेजों को प्रति वर्ष इंग्लैंड भेजी जा रही अंग्रेज़ों को पाँच करोड़ की पेंशन बंद करवा दिया l चौरीचौरा कांड के 99 प्रतिशत को फाँसी की सज़ा से ही नहीं , बाईज्जत बरी करवा दिया l अंबेडकर ने किसी एक भी स्वतंत्रता सेनानी को कभी छुड़ाया ? कोई मुकदमा लड़ा ? थे तो वह भी बैरिस्टर ही। लेकिन दुर्भाग्य कि लोग सिर्फ बी एच यू के लिए जानते हैं मदन मोहन मालवीय को। मालवीय जी ने सिर्फ़ बी एच यू ही नहीं बनाया l आज जो आप उर्दू मिश्रित हिंदी पढ़ते हैं , मदन मोहन मालवीय की देन है l 

ऐसा बहुत कुछ है जो आप मदन मोहन मालवीय के बारे में नहीं जानते l बी बी सी वाले मधुकर उपाध्याय को तो आप जानते ही हैं l मदन मोहन मालवीय पर लिखी उन की किताब ही पढ़ लीजिए l मधुकर उपाध्याय न संघी हैं , न भाजपाई l पर आप इन दिनों अपनी घृणा में इतने लथपथ हैं कि कुछ जानने समझने का अवकाश कहां रह गया है आप के पास ? 

पुन: चुनौती दे कर पूछ रहा हूं कि अंबेडकर द्वारा दिया गया पानी मालवीय द्वारा न पिए जाने का क्या प्रमाण है ? कोई प्रामाणिक दस्तावेज या कोई किताब है ? कि अंबेडकर ने कहीं लिखा है ? एक बात और जान लेनी चाहिए आप और आप जैसे घृणा और नफरत में लोटपोट लोगों को कि मदनमोहन मालवीय महान स्वतंत्रता सेनानी थे। अंबेडकर स्वतंत्रता सेनानी नहीं , अंग्रेजों के ख़ास पिट्ठू थे। गांधी ने उन्हें इस पिट्ठूगीरी से कैसे और किस कीमत पर निकाला , यह जानने के लिए भी गांधी वांग्मय पढ़िए और पूना पैक्ट के डिटेल भी। 

छुट्टी लीजिए अपनी घृणा और नफ़रत से l इस फेर और कुटैव में आप अपनी रचनात्मकता बिसार गए हैं l यह बहुत ही अफ़सोसजनक है हमारे जैसे आप के प्रिय लोगों के लिए l कि आप को मदन मोहन मालवीय जैसे विराट व्यक्ति के बारे में इस तरह कीचड़ में नहाना पड़ा है l नहीं जानते तो अब से जान लीजिए कि मदन मोहन मालवीय बैरिस्टर ही नहीं , बहुत बड़े पत्रकार और संपादक भी रहे हैं l मालवीय जी के संपादक और उस की रीढ़ के बारे में सुनेंगे तो दांतों तले उंगली दबा लेंगे l मदन मोहन मालवीय के संपादक का भी एक क़िस्सा सुन लीजिए। राजा कालाकांकर रामपाल सिंह ने अंग्रेजों से लड़ने के लिए 1887 में इलाहाबाद से एक अख़बार हिंदुस्तान निकाला। मदनमोहन मालवीय को दो सौ रुपए महीने पर संपादक बनाया। जो आज के कोई बीस लाख रुपए महीने से भी अधिक ठहरेगा। अक्सर मालिकान संपादकों से शर्त रखते हैं। हिंदुस्तान में मालवीय जी ने अखबार मालिक से एक शर्त रखी कि जब भी कभी आप शराब पिए हों तो मुझे भूल कर भी नहीं बुलाएं। कोई ढाई साल तक राजा कालाकांकर ने मालवीय जी की इस बात का ख्याल रखा। और शराब पिए रहने पर कभी नहीं बुलाया। 

एक रात वह यह बात भूल गए। 

शराब पी ली और मालवीय जी को बुला लिया। मालवीय जी गए और उलटे पांव लौट आए । इस्तीफ़ा भेज दिया। राजा कालांकाकर ने इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं किया। मालवीय जी फिर भी नहीं गए। पर दो सौ रुपए महीने मालवीय जी के घर राजा कालांकाकर भिजवाते रहे। यह सोच कर कि शायद मालवीय जी लौट आएं। बहुत समय बाद किसी कार्यक्रम में दोनों की भेंट हुई। मालवीय जी ने कहा कि हमने आप के अख़बार की नौकरी छोड़ दी है फिर भी आप पैसे भिजवा रहे हैं। राजा साहब ने कहा कि हमने आप को कर्मचारी नहीं रखा था। आप परिवार के सदस्य हैं। इस लिए पैसे भेजता रहूंगा। मालवीय जी फिर भी अखबार में नहीं लौटे। 

जानिए कि एक समय मदन मोहन मालवीय और मोतीलाल नेहरू दोनों ही बड़े वकील थे। दस हज़ार रुपए रोज की प्रैक्टिस थी मालवीय जी की। पर अंग्रेजों से लड़ने के लिए दस हज़ार रुपए की रोज की प्रैक्टिस छोड़ दी। मोतीलाल नेहरू ने आनंद भवन बनाया इलाहाबाद में। एक-एक रुपए बटोर कर मालवीय जी ने बी एच यू बनवाया। कोई भवन नहीं। स्वत्रंत्रता संग्राम के अलावा शिक्षा , वकील , पत्रकार , स्वदेशी , हरिजनों का उद्धार , हिंदी आदि ऐसे अनेक काम हैं मदन मोहन मालवीय के। मदन मोहन मालवीय ने अंग्रेजों की लाठियां भी बहुत खाईं और जेल भी बहुत बार गए। लेकिन अंबेडकर ने न कभी कोई एक लाठी खाई , न जेल गए। पूना पैक्ट ज़रूर किया। अंबेडकर तो टाई बांध कर कार से चलते थे। अंबेडकर ब्राह्मण सरनेम है , आप जानते ही होंगे। अंबेडकर का सही सरनेम जगपाल है। मदन मोहन मालवीय बहुत गरीब परिवार से थे। घर-घर कथा बांच कर अपनी पढ़ाई का , परिवार का खर्च चलाते थे। किसी राजा बड़ौदा या अंग्रेजों के खर्च से पढ़ाई नहीं की मालवीय जी ने। मालवीय जी उपवास भी कर जाते थे कई बार। घर के लोग भी। क्यों कि घर में खाने को कुछ नहीं होता था। यह भी जानिए कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी मालवीय जी का क्या योगदान है l सर सैय्यद भी मालवीय जी के शिष्य हैं l बहुतेरी बातें हैं l फिर कभी l

[ एक मित्र की पोस्ट पर मेरा यह एक कमेंट। ] 

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