Saturday, 5 September 2026

राजनीति और समाज में दलित ब्लैकमेलिंग का अनूठा रिकार्ड

दयानंद पांडेय


मैं निशु और उनके परिवार के साथ हूं... न्याय दिलाने की जिम्मेदारी लेता हूं...

- चिराग पासवान

इस में नया कुछ नहीं है l भारत में अभी तक की दलित राजनीति का रिकार्ड , ब्लैकमेलिंग की ही है l हर पार्टी, हर सरकार में l यह होता रहा है , होता रहेगा l यह वही निशु है , जो जंतर मंतर पर नरेंद्र मोदी के श्राद्ध का समोसा खिला रही थी l यह वही चिराग पासवान हैं , जो अपने को नरेंद्र मोदी का हनुमान बताते नहीं थकते l अंबेडकर से लगायत, जगजीवन राम , मायावती , पासवान पिता-पुत्र आदि-इत्यादि सभी की राजनीति की बिसात ब्लैकमेलिंग ही रही है , सर्वदा रहेगी l नरेंद्र मोदी ने राजनीति और समाज में इस दलित ब्लैकमेलिंग को नित नया आयाम दिया है l खूब घी पिलाया है l पिलाते रहेंगे l कोई अचरज नहीं होगा कि मोदी की तेरहवीं का भोजन इंजवाय करवाने वाली निशु के पक्ष में नरेंद्र मोदी ख़ुद भी खड़े दिखें l निशु को न्याय दिलाने के लिए मोदी व्यग्र दिखें l राजनीति और समाज में दलित ब्लैकमेलिंग को पोषित , पुष्पित और पल्लवित करने वाला अनूठा और अद्भुत नमूना हैं नरेंद्र मोदी l

सोचिए कि गांधी न होते तो भारतीय राजनीति में अंबेडकर कहां होते ? होते भी भला ? लेकिन गांधी को अगर सर्वाधिक गालियां किसी ने दी हैं , निंदा की है , छवि धूमिल की है तो वनली वन अंबेडकर ने l याद कीजिए वह ज़माना जब मुख्यमंत्री रहते हुए भी मायावती गांधी को शैतान की औलाद का फ़तवा जारी करती रहती थीं l गांधी दलितों को हरिजन कहते और लिखते रहे थे l हरिजन मतलब भगवान की संतान l मायावती को इस पर खासा ऐतराज था l इसी बिना पर वह तंज में कहती थीं कि अगर दलित हरिजन हैं तो क्या गांधी , शैतान की औलाद था l मायावती के इस कहे के पीछे अंबेडकर फ़िलासफ़ी थी l

बहरहाल, मायावती के इस तंज के जवाब में एक पी सी एस अफसर अपने नाम के आगे हरिजन लिखने लगे l मायावती ने उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया मायावती के पूरे कार्यकाल में वह सस्पेंड रहे l कल्याण सिंह सरकार में बहाल हुए l ख़ैर , तब के दिनों एक इंटरव्यू में मैं ने मुख्यमंत्री रही मायावती से पूछा था कि जिस गांधी को दो तिहाई दुनिया लगभग पूजती है , उस को आप शैतान की औलाद कहती हैं , आप को झिझक या संकोच नहीं होता ?

यह सवाल सुनते ही मायावती जैसे चहक उठी थीं l वह बोलीं , यह कोई नई बात तो मैं कह नहीं रही l बाबा साहब भी यही कहते थे l पढ़ो बाबा साहब अंबेडकर की किताब l वह आगे बोलीं , शैतान की औलाद कहने के बाद रैलियों में मुझे मिलने वाली थैलियां बड़ी होती जा रही हैं l पहले जहां दो लाख , चार लाख की थैली भेंट में मिलती थी , अब पाँच लाख , दस लाख से ऊपर की थैलियां मिलने लगी हैं l भीड़ बढ़ती जा रही है l

सोचिए वह गांधी जिन्हों ने नेहरू के लाख विरोध के हर बार गोलमेज सम्मेलन में अंबेडकर को लंदन भेजा l ख़ुद दो बार गए गांधी , गोलमेज सम्मेलन में लेकिन अंबेडकर को चार बार भेजा l यानी हर बार l नेहरू और पटेल भी दो ही बार l तब जब कि अंबेडकर स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे l कभी जेल नहीं गए l लाठी नहीं खाई l उल्टे अंग्रेजों की पिट्ठूगिरि की l अंग्रेजों की दलाली की l

नेहरू के तमाम विरोध के बावजूद गांधी ने नेहरू सरकार में अंबेडकर को क़ानून मंत्री बनवाया l तमाम विरोध के बावजूद अंबेडकर को संविधान सभा में रखवाया l ड्राफ्ट कमेटी का अध्यक्ष बनवाया l ऐसे अनेक राजनीतिक स्पेस गांधी के कारण अंबेडकर को मिले l इतना कि अम्बेडकरवादियों ने अंबेडकर को संविधान निर्माता बताने का दोगला काम शुरू कर दिया l अब तो क्या मोदी , क्या राहुल और कि दलित वोट का हर सौदागर , बाबा साहब का संविधान , अंबेडकर का संविधान कहने में संदूक कर लेता है l गोया संविधान सभा के अध्यक्ष बाबू राजेंद्र प्रसाद और संविधान सभा के 399 सदस्य जिस में मदन मोहन मालवीय, पटेल , नेहरू , कृपलानी , गोपालाचारी आदि तमाम लोग घास छील रहे थे l सलाहकार वी एन राव भी घास छीलने में व्यस्त थे l

संविधान तो बस अंबेडकर अकेले लिख गए l हिंदू धर्म और हिंदू प्रतीकों यथा राम आदि से घृणा रखने वाले अंबेडकर ने इतनी मेहनत और सदाशयता बरती कि राम आदि की फ़ोटो भी संविधान में दर्ज कर दिया l सकपाल सरनेम की जगह ब्राह्मण सरनेम अंबेडकर लिखने वाले भीमराव का यह सारा पाखंड गांधी की कृपा से ही अनवरत जारी रहा l गांधी का वरदहस्त होने के कारण लोग ख़ामोश रहे l

पर अंबेडकर ?

गांधी का कोई एहसान मानने के बजाए गांधी की ईंट से ईंट बजा दी थी , अंबेडकर ने l बजाते ही रहते थे l अंबेडकर ने गांधी को सर्वदा अपने जूते की नोक पर रखा l अपमानित किया l अंबेडकर के अनुयायी आज भी गांधी की बैंड बजाने में कोई कसर नहीं छोड़ते l इन विषैले अम्बेडकरवादियों के साथ ही वामपंथी भी गांधी के ख़िलाफ़ विषैली बीन बजाने में कोई कसर नहीं छोड़ते l

अटल बिहारी वाजपेयी नहीं होते तो मायावती , चार बार मुख्य मंत्री तो क्या जीवित भी नहीं रहतीं l मुलायम और अतीक अहमद उन्हें कच्चा खा गए होते l लेकिन वायदा कर के भी मायावती ने अटल जी के पक्ष में वोटिंग के बजाय संसद से बाहर निकल गईं l

वह मायावती जो मुख्य मंत्री की शपथ लेने के बाद भी राज भवन से बाहर निकलने का साहस नहीं रखती थीं l राज भवन से नहीं निकलीं l तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा से कहा कि यह रात मुझे राज भवन में ही रहने दीजिए l बाहर मेरी जान को खतरा है l मोतीलाल बोरा ने रात राजभवन में उन्हें रहने दिया l उन के रहने की ख़ास व्यवस्था की l मायावती को मुलायम और अतीक अहमद से जान का खतरा था l गेस्ट हाउस कांड में ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने मायावती की जान बचाई l नहीं अतीक अहमद तो गैस सिलिंडर ले कर गेस्ट हाउस पहुंचा था l मायावती को जला कर मार डालने के लिए l लेकिन तब अटल जी ने संसद में मामला उठाया l मायावती को सुरक्षा दिलवाई l पार्टी में तमाम विरोध के बावजूद भाजपा का समर्थन दे कर मायावती को मुख्य मंत्री बनवाया l वह भी बारंबार l चार बार l

खैर, मायावती की दगाबाज़ी से एक वोट से तब अटल सरकार गिर गई l अलग बात है , वह एक वोट उड़ीसा के मुख्य मंत्री गिरिधर गोमांग का था l अटल जी ने इस के बावजूद बाद के समय में कांशीराम को राष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव रखा l कांशीराम ने कहा कि अभी उन की ज़रूरत दलित मूवमेंट को है , राष्ट्रपति भवन को नहीं l कांशीराम ने कालांतर में अटल जी के साथ क्या अपमानजनक सुलूक किया , किसी से छुपा नहीं है l

जगजीवन राम ने भी निरंतर दलित ब्लैकमेलिंग के दम पर अनिवार्य रूप से सतत सत्ता का स्वाद चखा l रामधन आदि ने भी चंद्रशेखर को ब्लैकमेल किया l अपनी इसी दलित ब्लैकमेलिंग के दम पर मौसम विज्ञानी का चोला ओढ़ कर राम विलास पासवान ने हर पक्ष की सरकार में सत्ता सुख लिया l चिराग पासवान बाप से बड़े विज्ञानी हैं l चंद्रशेखर रावण जैसा लुच्चा जो ट्रंप , नेतान्यहू आदि पर दलित एक्ट लगवाने की डींग हांकने का अभ्यस्त है , दलित ब्लैकमेलिंग का सर्वश्रेष्ठ नमूना है l उदित राज टाइप, उस से बड़े नमूना l

दलित ब्लैकमेलिंग राजनीति में ही नहीं समाज में भी अब कैंसर बन कर उपस्थित है l यू जी सी आदि क्या है ? इतने समय बाद कोई सत्तर दिन बाद अब पता चल रहा है कि मोदी की तेरहवीं का खाना खिलाने , इंजवाय करवाने वाली निशु आज़ाद भी दलित हैं l उस का पिता भी दलित है l भीड़ में वह कैसे और कब पिटा ? जो भी हो एक बड़बोला स्वतंत्र भारद्वाज दलित एक्ट और हत्या की कोशिश में गिरफ्तार हो गया है l गांव-गांव , दफ्तर-दफ्तर, स्कूल, कालेज , अस्पताल आदि हर कहीं , हर कोई दलित एक्ट की ब्लैकमेलिंग से त्रस्त है l समूचा समाज त्रस्त है l आगे और होगा l निशु आज़ाद और स्वतंत्र भारद्वाज के तमाम अंतर्विरोधी वीडियो यू ट्यूब और सोशल मीडिया पर वायरल हैं l