Friday, 25 September 2026

राहुल गांधी नाम की सुलगती रस्सी

 दयानंद पांडेय


अब तो मेट्रो की बयार है l पर 1981 में जब दिल्ली में नौकरी करने लगा था तब पाया था कि डी टी सी के ज़्यादातर बस स्टैंड के आसपास पान की दुकान होती थी l उन पान की दुकानों के किनारे पर एक पतली रस्सी लगातार सुलगती रहती थी l लोग बाग उस सुलगती रस्सी से अपनी-अपनी सिगरेट सुलगाया करते थे l मुझे यह देख कर बहुत बुरा लगता था l गो कि सिगरेट तब ही पीता था , जब कोई पिलाता था l ख़ुद कभी नहीं ख़रीदता था l

बहरहाल, सुलगती रस्सी से सिगरेट सुलगाना, सिगरेट का ज़ायक़ा ख़राब करना होता था l जो लुत्फ़ और सुरूर माचिस की तीली से सिगरेट सुलगाने में था , वह किसी सुलगती रस्सी में तनिक भी नहीं था l माचिस की तीली से सिगरेट सुलगाने में लगता था जैसे ख़ुद सुलग रहे हों l नसें तड़क जाती थीं l सुलगती रस्सी से सिगरेट में यह सुरूर और सुलगन स्वाहा हो जाती थी l मुर्दों जैसी फीलिंग आती थी l भारतीय राजनीति में राहुल गांधी वही सुलगती रस्सी हैं l

सत्ता का स्वाद चखने के लिए वह ख़ुद तो निरंतर सुलगते रहते हैं l पर जिस भी मुद्दे को वह छूते हैं , मुर्दा बना देते हैं l कुछ दिनों में उस का ख़ुद ही श्राद्ध कर देते हैं l राफेल , सावरकर , ई वी एम, वोट चोरी , हाइड्रोजन बम आदि-इत्यादि से लगायत कोई एक भी मामला निर्णायक मोड़ पर वह ले गए हों तो कोई बताए भी l

चौकीदार चोर है , सावरकर जैसे मुद्दों पर शपथपूर्वक अदालत में माफ़ी मांग चुके हैं l चिल्लाते रहे , माफीवीर सावरकर नहीं हूं, राहुल गांधी हूं ! पर शपथ पूर्वक अदालत में माफ़ी मांग बैठे l फिर सावरकर का नाम ही वह भूल गए l उन की ब्रिगेड भी l मुख्य चुनाव आयुक्त मामले का भी जल्दी ही वह श्राद्ध कर कोई और मुर्दा मुद्दा उठा लेंगे , अगला श्राद्ध करने के लिए l

देखते रहिए !

जैसे कि एक न्यूज़ चैनल अपने एक शो में बाकायदा ब्लैक बोर्ड लगा कर न्यूज़ समझाता है , राहुल गांधी भी बाक़ायदा ब्लैक बोर्ड और तमाम इधर -उधर के विजुअल आदि दिखाते हुए प्रेस कांफ्रेंस कर देश को पढ़ाने का आनंद देते और लेते हैं l लेकिन कुछ कांग्रेसियों और मीडिया को छोड़ कर उन की क्लास कोई पढ़ता नहीं l वोट चोर , गद्दी छोड़ की क्लास वह पढ़ाते रहते हैं l पर कुछ कांग्रेसियों और मीडिया वालों को छोड़ कर सब उन की क्लास बंक कर जाते हैं l

रिजल्ट ख़राब हो जाता है l

अब राहुल गांधी ने स्टैंडअप कमेडियनो को भी आज़माना शुरू किया है l संदीप दीक्षित के साथ मेलोनी सीन में पिटने के बाद अब वह सेटिंग वाली माँ में भी मुँह की खा गए हैं l

हिंदी फ़िल्मों के एक बड़े अभिनेता थे राज कुमार l राहुल गांधी कई बार राजकुमार से भी प्रेरणा ले लेते हैं l कई वाक़ये हैं राजकुमार के l पर एक वाक़या सुनिए l रामायण फ़ेम रामानंद सागर एक फ़िल्म बना रहे थे , आँखें l राजकुमार को फ़िल्म का हीरो बनाना चाहते थे l समय लिया और गए राजकुमार के घर l कहानी सुनाई l राजकुमार को कहानी पसंद आ गई l पर साईन करने के पहले उन्हों ने अपने कुत्ते को अपने पास बुलाया और उस से पूछा , यह फ़िल्म कर लूं ? कुत्ते न , न में सिर हिला दिया l बड़े अफ़सोस के साथ राजकुमार , रामानंद सागर से बोले , यह तो मना कर रहा है !

रामानंद सागर चुपचाप उठ कर चले गए l बाद में धर्मेंद्र हीरो बने आँखें की और फ़िल्म सुपर हिट रही l सुनते हैं राहुल गांधी भी अपने कुत्तों और सिक्योरिटी गार्डों की सलाह से राजनीतिक सलाह लेते रहते हैं l ग़ुलाम नबी आज़ाद , हिमंत बिश्वशर्मा ने ऐसे खुलासे किए भी हैं l बाक़ी के सी वेणुगोपाल, जयराम रमेश , पवन खेड़ा आदि उन की सलाहकार मंडली भी किन स्वामी भक्त श्वानों से कम है ?

एक बड़े पत्रकार हुए हैं विनोद मेहता l बहुत सफल और प्रतिष्ठित संपादकों में शुमार हैं l लेकिन पत्रकारिता के पतन के चलते उन्हों ने अपने कुत्ते का नाम ही एडिटर रख दिया था l एक बार निजी बातचीत में मुझे उन्हों ने यह बताया था l क्या पता कहीं राहुल गांधी ने भी अपने किसी कुत्ते का नाम पी एम या एल ओ पी रख रखा हो l

आख़िर सुलगती रस्सी हैं l

राहुल गांधी का एक और हवाई फ़ायर

दयानंद पांडेय


राहुल गांधी और उन की कांग्रेस फिर हवाई फ़ायर पर आमादा है l बल्कि पूरा इंडिया गठबंधन l बिहार का एक कोई सहनी है , गोली मारने की हांक रहा है l बिहार के पासवान और कुशवाहा भी ज्ञान दे चुके हैं l

सच तो यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुप्ता को हटाने का सिर्फ़ दो रास्ता है l एक तो वह इस्तीफ़ा दे दें l जो वह देने से रहे l दूसरा रास्ता है , संसद में उन के ख़िलाफ़ महाभियोग पेश किया जाए और उसे पारित करावाया जाए l

यह बिना बहुमत के मुमकिन नहीं l

बहुमत होता राहुल गांधी के पास तो वह प्रधान मंत्री होते , नेता प्रतिपक्ष नहीं l संसद चलने नहीं देंगे , सड़क पर आप के पास ताक़त नहीं है l काकरोच की आउटसोर्सिंग करनी पड़ती है l गगन बिहारी बातों से , विषैली बातों से सिर्फ़ समय व्यर्थ होता है , हासिल कुछ नहीं होता l जनता लतीफ़ा बता देती है l पप्पू कह देती है l तो बुरा लगता है l

बुरा लगने की बात भी है l

Thursday, 24 September 2026

दुर्योधन और तुग़लक़ का मिला जुला कोलाज हैं राहुल गांधी

दयानंद पांडेय


सच तो यह है कि देश अब नरेंद्र मोदी को सत्ता से उखाड़ फेंकना चाहता है l सत्ता से बेदखल कर देना चाहता है l कम से कम भाजपा का कोर वोटर सवर्ण तो इस मोदी सरकार को नेस्तनाबूद कर देना चाहता है l आजिज आ गया है l

पर यह जो एक राहुल गांधी नाम का बेहूदा , फ्रस्ट्रेटेड, अराजक , ग़ैर राजनीतिक , अलोकतांत्रिक, सामंती व्यक्ति है, हर बार बीच में आ कर खड़ा हो जाता है l मोदी सरकार को बचा लेता है l निरंतर बचाता रहता है l लोग मोदी का विकल्प चाहते हैं , लेकिन राहुल गांधी तो हरगिज-हरगिज नहीं l ऐसी राजनीतिक विकल्पहीनता देश , पहली बार भुगत रहा है l

दरअसल राहुल गांधी, कलयुग का दुर्योधन हैं l बल्कि दुर्योधन और तुग़लक़ का मिलाजुला कोलाज हैं l

दुर्योधन की यह बात बिल्कुल सही थी , जायज थी कि अगर उस का पिता नेत्रहीन था , तो इस में उस का क्या दोष ? लेकिन दुर्योधन की बात जायज होते हुए भी उस के सारे तौर-तरीक़े नाजायज थे l द्रौपदी के चीर हरण से लगायत लाक्षागृह तक के l राहुल गांधी के भी बात करने का तरीका , अप्रोच, सोच सभी कुछ नाजायज होते हैं l तू-तकार और धत्त तेरी की लत्त तेरी की भाषा और ज़्यादा घातक है l तुग़लक़ भी कभी स्थिर नहीं रहता था l चमड़े का सिक्का , दिल्ली से दौलताबाद वाली हालत है l तुग़लक़ यह सब अपनी शासकीय अक्षमता छुपाने के लिए करता था l राहुल गांधी भी यही निरंतर करते रहते हैं l अपनी अक्षमता छुपाते हुए , तुग़लकी फ़ैसले करते रहते हैं l

संसद न चलने देना जैसे तमाम अभद्र तरीक़े , गुंडई, अभद्र और अराजक भाषा राहुल गांधी को गुंडा बना कर प्रस्तुत करते हैं l लतीफ़ा गांधी का रूप भी , हल्का बना देता है l राहुल गांधी को लगता है कि भारत की सत्ता उन की बपौती है l जो कि नहीं है l राहुल गांधी की हर प्रेस कांफ्रेंस पानी का बुलबुला बन जाती है l हाइड्रोजन बम, एटम बम आदि की बेवक़ूफ़ी भरी बातें l

आज की प्रेस कांफ्रेंस भी ऐसी ही बेतुकी थी l मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश से लाख असहमति , मतभेद हो सकते हैं पर देशद्रोही कहना , निरी मूर्खता है l ज्ञानेश के देश के प्रति अवदान को वह नहीं जानते l संसद में बोलना होता नहीं l कभी ग़लती से बोल भी देते हैं तो क्या बोलते हैं , वही जानते हैं या फिर कुछ चुने हुए कांग्रेसी l

अभी राहुल गांधी ने कांग्रेस को डुबोया है , सत्ता हाथ में आते ही देश को डुबोने में इसे दो दिन का भी समय बहुत ज़्यादा है l देश डुबो देगा l

Wednesday, 23 September 2026

सत्ता के नशे में प्याज और जूते दोनों खाने की लत

दयानंद पांडेय


सहमति और असहमति की अंत्याक्षरी में देश झुलस रहा है l तो भी चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति कोई पहली बार नहीं हुई है l मुंडे-मुंडे मतिर्भिन्ना की अवधारणा प्राचीन है l चुनाव आयोग में पहले के भी असहमति के अनेक किस्से हैं l सुप्रीम कोर्ट , हाई कोर्ट की बेंच में भी निरंतर असहमति आम बात है l कोई भी फ़ैसला बहुमत या सर्वसम्मत से होता रहता है l देखिए न सुप्रीम कोर्ट में भी अभी इसी चुनाव आयोग के मुद्दे पर मतभेद की ख़बर आ गई है l दो जज इस मसले को सुन रहे थे l आपसी सहमति न होने पर मामला चीफ़ जस्टिस को सौंप दिया गया है l यह एक प्रक्रिया है l पुरानी है , नई नहीं l

लेकिन विपक्ष और मीडिया की रोजी रोटी भी एक तत्व है l आनंद लीजिए इस रोज़ी रोज़गार का l चिंतित नहीं l बिल्कुल नहीं l लोकतंत्र ख़तरे में नहीं है l ख़तरे में तो हमारा समाज है l जाति, आरक्षण , दलित की ब्लैकमेलिंग में है l

अब देखिए न बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की के साथ अभद्रता की बात बहुत ज़ोर शोर से उठी l आरोपियों के भगवा गमछे ने आग लगा दी l लेकिन जैसे ही पता चला कि आरोपी यादव और मुस्लिम हैं , आग बुझ गई l प्रतिपक्ष और उस का पालतू मीडिया ख़ामोश हो गया l तेजस्वी यादव को साँप सूंघ गया है l

मुंबई में आई आई टी मामले में भी असहमति का आनंद देखिए l जिस लड़के ने आत्महत्या की , उस के पिता और माता शोक में नहीं , आंदोलन के मूड में है l अव्वल तो उन्हें मुआवजा तुरंत चाहिए l बाक़ी उन के तेवर बता रहे हैं कि वह चुनाव लड़ने की तैयारी में है l बेटे की लाश पर वह नेता बनने की तैयारी में है l पिता जाँच हुए बिना वह प्रोफ़ेसर की गिरफ़्तारी का पहाड़ा पढ़ रहा है l उपदेश दे रहा है l प्रोफ़ेसर को एकतरफा दोषी बता देने की बात पर असहमतियों का सागर हिलोरें मार रहा है l ग़नीमत बस यही है कि प्रोफ़ेसर गुल्ला भी ओ बी सी हैं l खुदा न खास्ता अगर सवर्ण होते तो ? उस में भी अगर ब्राह्मण होते तो ?

मुंबई आग के हवाले हो गई होती l आई आई टी ही जला देते l धुआँ-धुआँ हो गई होती l अभी तो देश की लगभग सभी आई आई टी की फैकल्टी प्रोफेसर को नैतिक समर्थन दे कर साथ खड़ी हैं l यह बहुत बड़ी बात है l पर दलित एक्ट को इसी तरह सभी राजनीतिक पार्टियां वोट बैंक के चक्कर में तलवार बना कर चमकाती रहीं तो देश और समाज किस मोड़ पर खड़ा मिलेगा , सोच कर एक बार देख लीजिए l मेडिकल की सीटों पर माइनस चालीस का बुखार चढ़ा ही है अब आई आई टी को भी इस में झुलसाने की तैयारी हो गई है l

आरक्षण के भिखारी और कोढ़ी एडमिशन तो आरक्षण से पा जाते हैं l फ़ीस मुफ़्त हो जाती है और हास्टल भी l पर पढ़ाई के लिए अपेक्षित बुद्धि और मेहनत तो आरक्षण से नहीं मिल पाता l अर्जित करनी पड़ती है l नहीं मिलती तो नकल करते हैं l पकड़े जाते हैं l दलित फलित का ड्रामा करते हैं l लांछन लगाते हैं l आत्महत्या कर लेते हैं l अभी-अभी मेडिकल के एक यादव छात्र की आत्महत्या की ख़बर आ रही है l

करेला और नीम चढ़ा पहले ही सा था पर मोदी सरकार ने लाखों के मुआवजे का विष पिला कर दलितों को भस्मासुर बना दिया है l यू जी सी रोल बैक पर अगर धर्मेंद्र प्रधान हटा दिए गए होते तो काकरोचों से इस तरह अपमानित न होना पड़ता l लेकिन मोदी और उन की सरकार को सत्ता के नशे में प्याज और जूते दोनों खाने की लत लग गई है l संसद में फ़ैसला बदल कर सुप्रीम कोर्ट के हाथ बांध दिए हैं l संसद और सुप्रीम कोर्ट की इस असहमति का क्या करेंगे ?

संविधान में ही तमाम असहमतियां और अंतर्विरोध के बीज भरे पड़े हैं l

तो क्या देश में जातीय आग लगा देने के बाद ही सभी राजनीतिक पार्टियों का सत्ता सुख लेना फ़ार्मूला बन गया है l जातियों की सहमति और असहमति की यह अंत्याक्षरी देश को किस तरह खोखला और निर्जीव बना गई है , देखना दुर्भाग्यपूर्ण है l

Saturday, 5 September 2026

राजनीति और समाज में दलित ब्लैकमेलिंग का अनूठा रिकार्ड

दयानंद पांडेय


मैं निशु और उनके परिवार के साथ हूं... न्याय दिलाने की जिम्मेदारी लेता हूं...

- चिराग पासवान

इस में नया कुछ नहीं है l भारत में अभी तक की दलित राजनीति का रिकार्ड , ब्लैकमेलिंग की ही है l हर पार्टी, हर सरकार में l यह होता रहा है , होता रहेगा l यह वही निशु है , जो जंतर मंतर पर नरेंद्र मोदी के श्राद्ध का समोसा खिला रही थी l यह वही चिराग पासवान हैं , जो अपने को नरेंद्र मोदी का हनुमान बताते नहीं थकते l अंबेडकर से लगायत, जगजीवन राम , मायावती , पासवान पिता-पुत्र आदि-इत्यादि सभी की राजनीति की बिसात ब्लैकमेलिंग ही रही है , सर्वदा रहेगी l नरेंद्र मोदी ने राजनीति और समाज में इस दलित ब्लैकमेलिंग को नित नया आयाम दिया है l खूब घी पिलाया है l पिलाते रहेंगे l कोई अचरज नहीं होगा कि मोदी की तेरहवीं का भोजन इंजवाय करवाने वाली निशु के पक्ष में नरेंद्र मोदी ख़ुद भी खड़े दिखें l निशु को न्याय दिलाने के लिए मोदी व्यग्र दिखें l राजनीति और समाज में दलित ब्लैकमेलिंग को पोषित , पुष्पित और पल्लवित करने वाला अनूठा और अद्भुत नमूना हैं नरेंद्र मोदी l

सोचिए कि गांधी न होते तो भारतीय राजनीति में अंबेडकर कहां होते ? होते भी भला ? लेकिन गांधी को अगर सर्वाधिक गालियां किसी ने दी हैं , निंदा की है , छवि धूमिल की है तो वनली वन अंबेडकर ने l याद कीजिए वह ज़माना जब मुख्यमंत्री रहते हुए भी मायावती गांधी को शैतान की औलाद का फ़तवा जारी करती रहती थीं l गांधी दलितों को हरिजन कहते और लिखते रहे थे l हरिजन मतलब भगवान की संतान l मायावती को इस पर खासा ऐतराज था l इसी बिना पर वह तंज में कहती थीं कि अगर दलित हरिजन हैं तो क्या गांधी , शैतान की औलाद था l मायावती के इस कहे के पीछे अंबेडकर फ़िलासफ़ी थी l

बहरहाल, मायावती के इस तंज के जवाब में एक पी सी एस अफसर अपने नाम के आगे हरिजन लिखने लगे l मायावती ने उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया मायावती के पूरे कार्यकाल में वह सस्पेंड रहे l कल्याण सिंह सरकार में बहाल हुए l ख़ैर , तब के दिनों एक इंटरव्यू में मैं ने मुख्यमंत्री रही मायावती से पूछा था कि जिस गांधी को दो तिहाई दुनिया लगभग पूजती है , उस को आप शैतान की औलाद कहती हैं , आप को झिझक या संकोच नहीं होता ?

यह सवाल सुनते ही मायावती जैसे चहक उठी थीं l वह बोलीं , यह कोई नई बात तो मैं कह नहीं रही l बाबा साहब भी यही कहते थे l पढ़ो बाबा साहब अंबेडकर की किताब l वह आगे बोलीं , शैतान की औलाद कहने के बाद रैलियों में मुझे मिलने वाली थैलियां बड़ी होती जा रही हैं l पहले जहां दो लाख , चार लाख की थैली भेंट में मिलती थी , अब पाँच लाख , दस लाख से ऊपर की थैलियां मिलने लगी हैं l भीड़ बढ़ती जा रही है l

सोचिए वह गांधी जिन्हों ने नेहरू के लाख विरोध के हर बार गोलमेज सम्मेलन में अंबेडकर को लंदन भेजा l ख़ुद दो बार गए गांधी , गोलमेज सम्मेलन में लेकिन अंबेडकर को चार बार भेजा l यानी हर बार l नेहरू और पटेल भी दो ही बार l तब जब कि अंबेडकर स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे l कभी जेल नहीं गए l लाठी नहीं खाई l उल्टे अंग्रेजों की पिट्ठूगिरि की l अंग्रेजों की दलाली की l

नेहरू के तमाम विरोध के बावजूद गांधी ने नेहरू सरकार में अंबेडकर को क़ानून मंत्री बनवाया l तमाम विरोध के बावजूद अंबेडकर को संविधान सभा में रखवाया l ड्राफ्ट कमेटी का अध्यक्ष बनवाया l ऐसे अनेक राजनीतिक स्पेस गांधी के कारण अंबेडकर को मिले l इतना कि अम्बेडकरवादियों ने अंबेडकर को संविधान निर्माता बताने का दोगला काम शुरू कर दिया l अब तो क्या मोदी , क्या राहुल और कि दलित वोट का हर सौदागर , बाबा साहब का संविधान , अंबेडकर का संविधान कहने में संदूक कर लेता है l गोया संविधान सभा के अध्यक्ष बाबू राजेंद्र प्रसाद और संविधान सभा के 399 सदस्य जिस में मदन मोहन मालवीय, पटेल , नेहरू , कृपलानी , गोपालाचारी आदि तमाम लोग घास छील रहे थे l सलाहकार वी एन राव भी घास छीलने में व्यस्त थे l

संविधान तो बस अंबेडकर अकेले लिख गए l हिंदू धर्म और हिंदू प्रतीकों यथा राम आदि से घृणा रखने वाले अंबेडकर ने इतनी मेहनत और सदाशयता बरती कि राम आदि की फ़ोटो भी संविधान में दर्ज कर दिया l सकपाल सरनेम की जगह ब्राह्मण सरनेम अंबेडकर लिखने वाले भीमराव का यह सारा पाखंड गांधी की कृपा से ही अनवरत जारी रहा l गांधी का वरदहस्त होने के कारण लोग ख़ामोश रहे l

पर अंबेडकर ?

गांधी का कोई एहसान मानने के बजाए गांधी की ईंट से ईंट बजा दी थी , अंबेडकर ने l बजाते ही रहते थे l अंबेडकर ने गांधी को सर्वदा अपने जूते की नोक पर रखा l अपमानित किया l अंबेडकर के अनुयायी आज भी गांधी की बैंड बजाने में कोई कसर नहीं छोड़ते l इन विषैले अम्बेडकरवादियों के साथ ही वामपंथी भी गांधी के ख़िलाफ़ विषैली बीन बजाने में कोई कसर नहीं छोड़ते l

अटल बिहारी वाजपेयी नहीं होते तो मायावती , चार बार मुख्य मंत्री तो क्या जीवित भी नहीं रहतीं l मुलायम और अतीक अहमद उन्हें कच्चा खा गए होते l लेकिन वायदा कर के भी मायावती ने अटल जी के पक्ष में वोटिंग के बजाय संसद से बाहर निकल गईं l

वह मायावती जो मुख्य मंत्री की शपथ लेने के बाद भी राज भवन से बाहर निकलने का साहस नहीं रखती थीं l राज भवन से नहीं निकलीं l तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा से कहा कि यह रात मुझे राज भवन में ही रहने दीजिए l बाहर मेरी जान को खतरा है l मोतीलाल बोरा ने रात राजभवन में उन्हें रहने दिया l उन के रहने की ख़ास व्यवस्था की l मायावती को मुलायम और अतीक अहमद से जान का खतरा था l गेस्ट हाउस कांड में ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने मायावती की जान बचाई l नहीं अतीक अहमद तो गैस सिलिंडर ले कर गेस्ट हाउस पहुंचा था l मायावती को जला कर मार डालने के लिए l लेकिन तब अटल जी ने संसद में मामला उठाया l मायावती को सुरक्षा दिलवाई l पार्टी में तमाम विरोध के बावजूद भाजपा का समर्थन दे कर मायावती को मुख्य मंत्री बनवाया l वह भी बारंबार l चार बार l

खैर, मायावती की दगाबाज़ी से एक वोट से तब अटल सरकार गिर गई l अलग बात है , वह एक वोट उड़ीसा के मुख्य मंत्री गिरिधर गोमांग का था l अटल जी ने इस के बावजूद बाद के समय में कांशीराम को राष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव रखा l कांशीराम ने कहा कि अभी उन की ज़रूरत दलित मूवमेंट को है , राष्ट्रपति भवन को नहीं l कांशीराम ने कालांतर में अटल जी के साथ क्या अपमानजनक सुलूक किया , किसी से छुपा नहीं है l

जगजीवन राम ने भी निरंतर दलित ब्लैकमेलिंग के दम पर अनिवार्य रूप से सतत सत्ता का स्वाद चखा l रामधन आदि ने भी चंद्रशेखर को ब्लैकमेल किया l अपनी इसी दलित ब्लैकमेलिंग के दम पर मौसम विज्ञानी का चोला ओढ़ कर राम विलास पासवान ने हर पक्ष की सरकार में सत्ता सुख लिया l चिराग पासवान बाप से बड़े विज्ञानी हैं l चंद्रशेखर रावण जैसा लुच्चा जो ट्रंप , नेतान्यहू आदि पर दलित एक्ट लगवाने की डींग हांकने का अभ्यस्त है , दलित ब्लैकमेलिंग का सर्वश्रेष्ठ नमूना है l उदित राज टाइप, उस से बड़े नमूना l

दलित ब्लैकमेलिंग राजनीति में ही नहीं समाज में भी अब कैंसर बन कर उपस्थित है l यू जी सी आदि क्या है ? इतने समय बाद कोई सत्तर दिन बाद अब पता चल रहा है कि मोदी की तेरहवीं का खाना खिलाने , इंजवाय करवाने वाली निशु आज़ाद भी दलित हैं l उस का पिता भी दलित है l भीड़ में वह कैसे और कब पिटा ? जो भी हो एक बड़बोला स्वतंत्र भारद्वाज दलित एक्ट और हत्या की कोशिश में गिरफ्तार हो गया है l गांव-गांव , दफ्तर-दफ्तर, स्कूल, कालेज , अस्पताल आदि हर कहीं , हर कोई दलित एक्ट की ब्लैकमेलिंग से त्रस्त है l समूचा समाज त्रस्त है l आगे और होगा l निशु आज़ाद और स्वतंत्र भारद्वाज के तमाम अंतर्विरोधी वीडियो यू ट्यूब और सोशल मीडिया पर वायरल हैं l