Sunday, 25 November 2018

आख़िर लौट गए वह लोग अयोध्या से


आख़िर लौट गए वह लोग अयोध्या से
लेकिन अयोध्या के लोगों को भरपेट डरा कर
शायद फिर आएंगे

अपराधी हैं यह लोग
सामान्य लोगों को डराने वाले इन अपराधियों को
माकूल सज़ा मिलनी चाहिए

सज़ा मिलनी चाहिए इन चैनलों को भी
जो अनाप-शनाप बयान दिखा-दिखा कर
अपनी दुकान चलाते है
और पूरे देश को डरा कर
नफ़रत और जहर का काला धुआं उड़ाते हैं
पैनिक फैला कर
पूरे देश में भय का माहौल बनाते हैं

सज़ा मिलनी चाहिए सुप्रीम कोर्ट के उन न्यायमूर्तियों को भी
जो तमाम मामलों की तरह
ऐसे सामाजिक सवेदना के विषय को भी
सामान्य मामला समझते हैं
सुनने और निर्णय देने का कलेजा नहीं रखते

तारीखों में उलझा कर
देश को नफ़रत के तंदूर में निरंतर भूनते रहते हैं
हत्यारों को रोज ज़मानत देने वालों के पास
टाइम क्यों नहीं है राम मंदिर का मामला सुनने के लिए
सज़ा मिलनी चाहिए इन न्याय की मूर्तियों को

सज़ा मिलनी चाहिए
ऐसे राजनीतिक दलों और उन के लोगों को
जो इस नफ़रत के तंदूर को निरंतर धधकाते रहते हैं
कोई प्रत्यक्ष रूप से , कोई अप्रत्यक्ष रूप से

राम के नाम पर
अगर कुछ लोग वोट बटोरने का दंभ भरते हैं
तो कुछ लोग
राम के खिलाफ लोगों को भड़का कर
वोट बटोरते हैं
यह सभी अपराधी हैं
सामूहिक अपराधी

इन सभी को एक साथ खड़ा कर सज़ा देनी चाहिए
यह सभी के सभी देश के गुनहगार हैं और गद्दार भी
इन्हें सजा ज़रूर दी जानी चाहिए

यह सभी अपराधी हैं

हे अपराधियों
राम को राम ही रहने दो , भगवान ही रहने दो
तंदूर की भट्ठी नहीं बनाओ
कि लोग , लोगों की संवेदनाएं जल कर खाक हो जाएं
मनुष्य को मनुष्य ही रहने दो
लोहा मत बनाओ
अयोध्या को लोहा पिघलाने वाली भट्ठी मत बनाओ
हमें मूर्ति नहीं बनना

अयोध्या को अयोध्या ही रहने दो
राम को राम

अयोध्या राम का नगर है
तुम्हारे वोट का जंगल नहीं
तुम्हारी वोट की दुकान का विज्ञापन नहीं है अयोध्या

काश कि तुम सभी अपराधियों को
एक साथ खड़ा कर गोली मार देने का कानून होता
क्यों कि तुम लोग पूरे देश को हिरोशिमा नागासाकी बनाना चाहते हो
परमाणु बम से ज़्यादा खतरनाक हो तुम लोग

[ 25 नवंबर , 2018 ]

2 comments:

  1. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' २६ नवंबर २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/



    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।



    आवश्यक सूचना : रचनाएं लिंक करने का उद्देश्य रचनाकार की मौलिकता का हनन करना कदापि नहीं हैं बल्कि उसके ब्लॉग तक साहित्य प्रेमियों को निर्बाध पहुँचाना है ताकि उक्त लेखक और उसकी रचनाधर्मिता से पाठक स्वयं परिचित हो सके, यही हमारा प्रयास है। यह कोई व्यवसायिक कार्य नहीं है बल्कि साहित्य के प्रति हमारा समर्पण है। सादर 'एकलव्य'

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  2. राम की जन्मभूमि को श्मशान-भूमि बनाए जाने तक आन्दोलन चलते रहेंगे.
    क्या ज़रूरी है कि हमारे देश को महमूद गज़नी, तैमूर, नादिरशाह, अहमदशाह अब्दाली या अंग्रेज़ों जैसा कोई विदेशी लुटेरा आकर लूटे? अब लुटेरों के और विध्वसकों के मामलों में हम आत्म-निर्भर हो गए हैं और सबसे अच्छी बात तो यह है कि हमने अपना और अपने देश का नसीब, ऐसे ही लोगों के हाथों में सौंप दिया है.

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