Tuesday, 6 April 2021

मुख़्तार अंसारी , बस आत्महत्या मत करना , अपनी फांसी की प्रतीक्षा करना

दयानंद पांडेय 

यह कौन सा धागा है , जिस से ऐसी चादर बुन ली मुख़्तार अंसारी कि दुनिया को डराते-डराते तुम ख़ुद डरने लगे। पत्ते की तरह कांपने लगे हाई वे पर। आखिर कैसे जुलाहे हो। कैसे बुनकर हो। कि अपने ही लिए फांसी का फंदा बुन लिया। ख़ैर , अब बांदा जेल में भी क्या मछली का तालाब खुदेगा कि नहीं ? लखनऊ या गाज़ीपुर की जेलों की तरह। डी एम , एस पी तुम्हारे साथ बैडमिंटन खेलने बांदा जेल में भी आएंगे क्या ? मुलायम , मायावती , आज़म खान कुछ मदद करेंगे भी ? लेकिन मुलायम तो अपने बेटे औरंगज़ेब की क़ैद में हैं। आय से अधिक संपत्ति के मामले के जांच की क़ैद अलग है। मायावती भी इसी आय से अधिक संपत्ति के मामले के जांच की क़ैद के साये में हैं। और वह जहरीली ज़ुबान के मालिक , भारत माता को डायन बताने वाले आज़म खान ?  

तुम पंजाब की जेल में ऐश करने क्या गए मुख्तार अंसारी कि वह आज़म ख़ान बीवी , बेटे समेत सीतापुर की जेल में एंट्री ले बैठे। अब दंगे-वंगे भी करवाने की हैसियत में तुम नहीं रहे मुख़्तार अंसारी। कानपुर के विकास दुबे की तरह मुठभेड़ भी नहीं नसीब होने वाली , न ही मुन्ना बजरंगी की तरह मारे जाओगे। मरोगे लेकिन तिल-तिल कर जेल में वी आई पी रुतबा पाने के लिए। जो दुर्गति कभी मायावती ने राजा भैया की करवाई थी कानपुर जेल में , उस से भी ज़्यादा दुर्गति तुम्हारी बांदा जेल में होगी मुख़्तार अंसारी। राजा भैया तो एक कूलर की ठंडी हवा खातिर तरस गया था। कूलर ख़राब हुआ तो ख़राब ही रहा , ठीक नहीं हुआ। हो सकता है बांदा जेल में तुम्हारा पंखा भी खराब हो जाए। ठीक ही न हो। फिर बांदा की गर्मी के क्या कहने ! ऐसे ही मरोगे तिल-तिल अपनी जान बचाते। बैरक की भीड़ में लाइन लगा कर खाना खाते , शौच के लिए बाथरूम की चौखट पर मूछ ऐंठते। अपनी बारी जोहते। कैमरे की नज़र में रहोगे। कोई जेल कर्मी पैसे ले कर भी तुम्हारी मदद नहीं कर पाएगा। 

तुम रास्ते में हो पर योगी ने अभी से तुम्हारी पल-पल की रिपोर्ट लेनी शुरू कर दी है। बस एक काम करना , मुख़्तार अंसारी  कि तुम आत्महत्या मत करना। ऐसी कोई ख़बर मत देना। अब देखो न , आज़म खान ने आत्महत्या की क्या ? नहीं न ! तुम भी मत करना। तब तक , जब तक कृष्णानंद राय समेत तमाम मामलों में तुम्हें फांसी की सज़ा न हो जाए। निश्चिंत रहो , मैं पूरे दावे के साथ कह रहा हूं कि अगर तुम ने आत्महत्या नहीं की तो तुम्हें फांसी की ही सज़ा मिलेगी और फांसी ही होगी। चाहे तो तुम्हारा कोई समर्थक मेरे इस लिखे को सेव कर के रख ले। ताकि सनद रहे और वक्त ज़रूरत काम आए। कि तुम्हें फांसी होगी , हर हाल होगी। कोर्ट में अब तारीखें नहीं मिलेंगी। खटाखट सुनवाई और फ़ैसला होगा। फांसी के तख्ते पर यही क़ानून तुम्हें ले जाएगा , जिस की बिसात पर तुम ने बचने के तमाम बंदोबस्त किए अब तक। इस लिए भी कि अब निजाम बदल गया है। तुम्हारी मिजाजपुर्सी वाला निजाम अब टाइल और टोटी चोरी में व्यस्त है। 

मुझे याद है। बहुत अच्छी तरह याद है कि विधान सभा में जब सपाई गुंडे विधायकों ने मायावती को जान से मारने के लिए यत्न किए , हिंसा शुरू की तब मायावती के एक इशारे पर कैसे तो कवच-कुण्डल बन कर मायावती की सुरक्षा में तुम खड़े हो गए थे। सपा विधायकों की सारी गुंडई , सारी प्लानिंग को तुम ने अकेले दम पर ख़ामोश रह कर  फेल भी कर दिया था। और मायावती किसी शिशु की तरह बकैया-बकैया भागी थीं , विधान सभा से। और तुम पीछे-पीछे उन्हें किसी कमांडो की तरह कवर करते रहे थे , मुख़्तार अंसारी। यह सब जब मैं ने साक्षात विधान सभा की प्रेस गैलरी से देखा था तुम्हारी उस दिलेरी पर दिल आ गया था। पर जब आज ख़बरों में पाया कि आगरा से लखनऊ एक्सप्रेस वे पर तुम पत्तों की तरह कांप रहे थे तो सहसा यक़ीन नहीं हुआ। 

वह सपाई जो गेस्ट हाऊस में मायावती को नहीं मार पाए थे , उस दिन विधान सभा में घेर कर मारना चाहते थे। कल्याण सिंह सरकार को बहुमत मिले , न मिले इस पर सपा के गुंडे विधायकों को कुछ लेना-देना नहीं था। विधान सभा में उन की हिंसा का मक़सद सिर्फ़ मायावती की हत्या का था। वह अपने नेता मुलायम के अपमान का बदला लेना था उस मायावती से , जिस ने तत्कालीन मुख्य मंत्री , उत्तर प्रदेश मुलायम को कान पकड़ कर उठक-बैठक करवाया। इस उठक-बैठक की चुपके से फ़ोटो खिंचवाई और एक अख़बार में छपवा दिया।  

इसी बात का बदला वह गेस्ट हाऊस में मायावती की हत्या कर लेना चाहते थे। तब मौके पर सुबह-सुबह भाजपा विधायक ब्रह्मदत्त ने मायावती की जान बचाई थी। उसी दिन संसद में मामला उठा कर अटल बिहारी वाजपेयी ने भी मायावती को सुरक्षा दिलवाई थी। फिर समूची प्रदेश इकाई के खिलाफ होने के बावजूद मायावती को अटल जी ने मुख्य मंत्री बनवा दिया था। लेकिन जब अटल जी को अपना प्रधान मंत्री पद बचाने के लिए मायावती के समर्थन की ज़रूरत पड़ी तो समर्थन देने का वायदा कर के भी मायावती पलट गई थीं। उस मायावती को मुख़्तार अंसारी तुम ने उस दिन विधान सभा में जीवन दिया था।  

वह दृश्य मेरी आंखों में आज भी जस का तस बसा हुआ है। वह मायावती और उस का पिट्ठू वकील सतीश मिश्रा क्या तुम्हारे बचाव में खड़े होंगे भला ? हरगिज नहीं। तुम्हारी अरबों की संपत्ति ध्वस्त हो चुकी है। सेक्यूलर फोर्सेज का गिनती-पहाड़ा भी ध्वस्त हो चुका है। अब कुछ भी शेष नहीं रहा। शेष है तो बस तुम्हारी फांसी। इस तुम्हारी फांसी की प्रतीक्षा मुझे बड़ी बेसब्री से है। क्यों कि मैं मानता हूं कि तुम्हारे जैसे दुर्दांत अपराधी को जीने का कोई हक़ नहीं। राजनीति ही नहीं समाज में भी तुम्हें रहने का हक़ नहीं है। मनुष्यता के दुश्मन हो तुम और तुम्हारे जैसे लोग।


मुख़्तार अंसारी की पैरोकारी कर रहे , अजब कमीने लोग हैं यह


मुख़्तार अंसारी पंजाब की जेल से उत्तर प्रदेश की बांदा जेल क्या ले आया गया है , क़यामत  आ गई है। गोया वह पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की कैबिनेट में था और यहां उत्तर प्रदेश ला कर उसे जेल में ठूंस दिया गया। मुख़्तार की पारिवारिक  पृष्ठभूमि के सुनहरे पन्ने खंगाले जा रहे हैं कि दादा यह थे , नाना वह थे। अरे भाई राहुल गांधी के पिता , दादा , दादी भी क्या कम थे। 

तो क्या राहुल गांधी को भी प्रधान मंत्री की कुर्सी सौंप देनी चाहिए इस बिना पर। पारिवारिक पृष्ठभूमि खंगालने के साथ मुख़्तार अंसारी का अपहरण उद्योग , मुख़्तार अंसारी द्वारा की गई हत्याएं , मुख़्तार द्वारा बटोरी गई अरबों की संपत्ति भी खंगालनी चाहिए। पर यह तथ्य लोग भूल गए हैं। बस इतना जानते हैं कि पंजाब में वह ऐश कर रहा था , उत्तर प्रदेश में उस से पत्थर तुड़वाया जाएगा। 

फ़र्क़ तो खैर आया ही है कि पंजाब की जेल की बैरक से मुख़्तार अंसारी ह्वील चेयर से एम्बुलेंस तक आया। बांदा जेल की बैरक में पैदल गया बैरक में। 900 किलोमीटर के पूरे रास्ते के लिए पैसा खर्च कर दर्जनों मीडिया चैनल को हायर किया। ताकि कैमरे तने रहें और वह सुरक्षित रहे। फ़र्क़ तो आया है। 

बाक़ी मुख़्तार अंसारी मुसलमान है सो योगी सरकार उस के साथ अन्याय करेगी ही यह सेक्यूलर एजेंडा सेट है ही। गोया मुन्ना बजरंगी , विकास दूबे भी मुसलमान थे। बस नाम हिंदू थे सो रगड़ दिए गए। तौबा , तौबा ! मुसलमान होने की प्रिवलेज पर पाकिस्तान बना लिया। अब मुसलमान होने की प्रिवलेज पर हत्यारे मुख़्तार अंसारी को दारा शिकोह बना देना चाहते हैं लोग। सूफी बना देना चाहते हैं। मुख़्तार अंसारी की पैरोकारी कर रहे , अजब कमीने लोग हैं यह।


3 comments:

  1. भाषा का शौर्य प्रशंसा से परे!

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  2. अप्रतिम अभिव्यक्ति।
    और उससे भी उच्चतर जानकारी... जो दुर्लभ है।

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  3. बेबाक लेखन ..और भाषा तो चूमने का मन करता है

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