Thursday, 21 February 2013

बंबई फ़िल्म इंडस्ट्री में जंगल का कानून हैः अर्चना जोगलेकर

सुपरिचित अभिनेत्री अर्चना जोगलेकर मानती हैं कि मसाला फ़िल्मों के लिए भी क्रिएटिविटी की ज़रूरत होती है। अपने को अच्छा कुक बताने वाली तथा अभिनय, नृत्य और वकालत की रेखाएं छूने वाली अर्चना जोगलेकर, किस्सा शांति का, कर्मभूमि, चुनौती और फूलवंती जैसे धारावाहिकों में अपने अभिनय से चर्चित हो चुकी हैं। वे इन दिनों किरन, अनुपमा और मोड़ जैसे धारावाहिकों में काम कर रही हैं। साथ ही वह अपने धारावाहिक साम्राज्य जिस की 13 कड़ियां प्रसारित हो चुकी हैं पर भी काम कर रही हैं। साम्राज्य में वह एक्टर, डायरेक्टर व राईटर तीनों हैं। नृत्य में उन की मां गुरू हैं सो नृत्य उन के चलने के साथ शुरू हो गया और 7 वर्ष की उम्र तक आते आते नृत्य की बकायदा शिक्षा ली। नृत्य करते-करते वह स्कूली नाटकों में भी काम करने लगीं फिर अचानक वह प्रोफ़ेशनल थिएटर में आ गईं। मराठी नाटक ‘उघडले स्वर्गा सेदार’ उन का पहला नाटक था और हिट रहा। इस नाटक के चार शो हुए। बेस्ट एक्ट्रेस का एवार्ड भी इस में मिला। पढ़ाई इस बीच भी जारी थी। अर्चना जोगलेकर ने बी.काम, एल.एल.बी. किया है और एल.एल.एम. की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। वह कहती हैं ‘मेरे अंदर की अभिनेत्री शायद ज़्यादा पावरफुल थी। सो बतौर एक्ट्रेस मैं ज़िंदा रही। फिर भी कुछ समय तक एक एडवोकेट के साथ मैं असिस्टेण्ट रही। तब मेरी प्रैक्टिस भी मजाक का विषय थी। एल.एल.एम. की पढ़ाई इसी लिए छोड़ी कि मेरे मन मुताबिक मेरा विषय नहीं मिला था। प्रोफ़ेसर का लेक्चर और मेरी नींद का एक ही समय होता था।’ ऐसा कहने वाली अर्चना जोगलेकर अभी कथक समारोह में अपना नृत्य पेश करने लखनऊ आईं। ्तभी अर्चना जोगलेकर से खास बातचीत की। पेश है बातचीतः- 
  • आप अभिनेत्री पहले हैं या नर्तकी? 
-पहले मैं नर्तकी हूं। और फिर हर नर्तकी अभिनेत्री होती है। पर अभिनेत्री नर्तकी नहीं हो सकती। 
  • अगर अभिनय और नृत्य दोनों में से किसी एक को चुनना हो तो? जैसे कि हेमा मालिनी कहती हैं कि डांस मेरा फर्स्ट लव है। 
-मैं ऐसा नहीं कहूंगी क्यों कि मैं डांस 24 घंटे नहीं सोचती। मैं राईटर भी हूं और डायरेक्टर भी। 
  • डायरेक्टर तो हेमा मालिनी भी हैं? 
-पर मैं एक विषय से बंध कर नहीं रह सकती। 
  • आपके व्यवहार में विनम्रता और चौंकन्नापन एक साथ दिखता है। तो क्या यह बंबई की ज़िंदगी का विरोधाभास है या कहूं कि कंट्रास्टस्ट है? 
-इस में कंट्रास्ट नहीं है। अगर चौकन्नी हूं तो ऐज ए एक्ट्रेस फ़िल्मी दुनिया में रहती हूं तो चौकन्नी रहना वाज़िब है। मेरी मां सिर्फ़ डांस प्रोग्राम में ही मेरे साथ होती हैं, शूटिंग में नहीं। तो मैं हमेशा अपनी गार्ड बनी रहती हूं। 
  • आप एक समय धारावाहिकों में छा गई थीं। पर इन दिनों गायब हैं? 
-हां, किस्सा शांति का, कर्मभूमि, चुनौती, फूलवंती। कई शार्ट स्टोरीज भी कीं। पर मैं इन दिनों गुम नहीं हूं। कुछ अच्छे सीरियल पाइलट हुए हैं। किरन, अनुपमा, मोड़। यह तीनों धारावाहिक जल्दी आने वाले हैं। इनमें मेरे टाइटिल रोल हैं। फिर अपना सीरियल साम्राज्य भी कांटीन्यू कर रही हूं। 
  • फूलवंती में आप की भूमिका लाजवाब रही है। आप को नहीं लगता कि नर्तकी होने के नाते आप इस में अपना बेस्ट दे पाईं? 
-हां, फूलवंती में मेरा चयन डांसर के नाते किया गया इस लिए थोड़ा लीक से हट कर है। मंगेशकर परिवार मुझे पहले से जानता था। इस लिए भी मेरा चुनाव हुआ। 
  • आप को नहीं लगता कि सब कुछ अच्छा होने के बावजूद भी फूलवंती की पूरी ध्वनि स्त्री को दबाने की है, स्त्री को डामीनेट करने की है? 
-फूलवंती की मार्फ़त एक सत्य घटना को हम बयान कर रहे हैं। तो इस में सोशल कमेंट की कोई ज़रूरत नहीं थी। 
  • आप को नहीं लगता कि अब आप कैमरे की आदी हो गई हैं? बिना कैमरे के आप के मनोभाव ठीक से संप्रेषित नहीं हो पाते। आप की लय और सोच कैमरे से ही ‘कवर’ हो पाती है। स्टेज पर आप गुम हो जाती हैं? 
-कैमरा जहां जो कर सकता है, करता है। आप को भावों के एक्सप्रेशन भी दिखा सकता है। कैमरा मीडिया दरअसल एक अभिनेत्री के उभरने का सब से सशक्त माध्यम है। यह सही है कि कैमरे के आगे मैं अपने को ज़्यादा पावरफुल प्रोजेक्ट कर सकती हूं ऐज एक्ट्रेस पर स्टेज पर मैं गुम हो जाती हूं-यह कहना आप का गलत है। 
  • बीते दिनों आप ने कुछ विज्ञापन फ़िल्मों में भी काम किया था? 
-हां, लिप्टन, टाटा चाय, पान पसंद, रामदेव मसाले में। पर विज्ञापन फ़िल्में मेरा कैरियर नहीं हैं। और फिर बिन चेहरे की माडल मैं थी नहीं। 
  • अगर आप डांसर या एक्ट्रेस न होतीं तो क्या होतीं? 
-वकील या अध्यापिका होती। वैसे टीचर तो मैं हूं आज भी। डांस सिखाती हूं मम्मी के स्कूल में। एयर होस्टेस भी हो सकती थी। एयर इंडिया में जॉब मिल भी गई थी पर फ़रवरी के 28 दिन के महीने में 29 दिन की शूटिंग थी। सो रिफ़्यू्ज़ करना पड़ा। 
  • आगे क्या करना चाहती हैं? 
-मैं संतुलन साधना चाहती हूं। बतौर डांसर, डायरेक्टर एंड राईटर। 
  • आप मसाला फ़िल्मों की ओर नहीं गईं? 
-दो फ़िल्में कीं। ‘संसार’ मेरी पहली फ़िल्म थी और ‘आतंक ही आतंक’ में रजनीकांत के साथ थी। 
  • आगे क्यों नहीं किया? 
-आफ़र तो मिले। अब मैं अपने को प्रोड्यूसर, डायरेक्टर के सामने फेंकने तो जाऊंगी नहीं। 
  • बम्बई फ़िल्म इंडस्ट्री के बारे में आप की क्या राय है? 
-बंबई फ़िल्म इंडस्ट्री में जंगल का कानून है। पर सिद्धांत है कि सर्व योग्य ही जीतता है। जिन सितारों को आप देखते हैं वह सिर्फ़ चिकने चुपड़े चेहरे ही नहीं हैं, उन के पीछे बुद्धि भी है। और फिर मैं जो क्षेत्र चुन चुकी हूं उस से खुश हूं। 
  • शादी के बारे में? 
-जिस समय सही इंसान सामने आएगा शादी कर लूंगी। लेकिन अब दिया ले कर ढूंढने तो निकलूंगी नहीं। यही एक चीज़ है मेरी ज़िंदगी में जिसे प्लान नहीं किया है और ऊपर वाले पर छोड़ दिया है। एक टिपिकल सोशल नार्मस के नाते मेरी मां ने भी शादी कराने की सोची पर बतौर गुरू मेरी कला को दिखाने का मौका दिया। 
  • हम लोग पहले आप को बतौर अभिनेत्री ही जानते रहे हैं, बतौर नर्तकी नहीं? आप को नहीं लगता कि आप अपने अभिनेत्री के नाम पर नृत्य की विधा में इस्तेमाल कर उस का शोषण कर रही हैं? 
-नहीं, यह गलत बात है। फिर अगर मैं एक कला के नाते दूसरी कला को पूरी कर सकती हूं तो करने में हर्ज़ क्या है। 

[१९९६ में लिया गया इंटरव्यू]

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