Sunday, 17 February 2013

संगीत से सरहदों को तोड़ देना चाहते हैं दलेर मेंहदी

‘बोल तरररर’ गीत की गायकी से साल भर में ही प्रसिद्धि का शिखर छूने वाले सुप्रसिद्ध पंजाबी पॉप लोक गायक दलेर मेंहदी का कहना है कि ‘तमाम सफलता के बावजूद मैं अभी भी स्ट्रगल कर रहा हूं।’ तो भी वह अपनी गायकी के बूते अखंड भारत का सपना संजो रहे हैं। वह तमाम देशों की सरहदें तोड़ देना चाहते हैं। दलेर मेंहदी का कहना है कि ‘मुझे सिर्फ़ हिंदुस्तान नहीं चाहिए। पाकिस्तान भी नहीं चाहिए। चीन और अफगानिस्तान भी नहीं चाहिए। पूरा एशिया मतलब अखंड भारत चाहिए। पहले जैसा भारत। टुकड़े-टुकड़े हो चुके भारत को मैं जोड़ना चाहता हूं। यह मेरी ज़िंदगी की सब से बड़ी और खास तमन्ना है।’ वह कहते हैं ‘इन सब को इकट्ठा करना है और मैं अपनी गायकी से यह करना चाहता हूं। लड़ाई थोड़े ही करनी है।’ कुल कक्षा ६ तक पढ़े दलेर सिंह की बातचीत में भदेसपन नहीं बदकता। बल्कि उन की बातचीत में विनम्रता और लोकप्रियता की शोखी घुल मिल कर तिरती रहती रहती है। बातचीत में वह कई बार भावुक भी हो जाते हैं। अपने संघर्ष के दिनों की वह याद करते हैं और कहते हैं कि ‘कई-कई दिन भूखे रहना पड़ा है। बेरोजगारी से तंग आ कर अमरीका गया। टैक्सी ड्राइवरी की, बर्गर बेचे और भी छोटे मोटे काम किए।’

पटना में पैदा हुए दलेर सिंह ने गायकी की यात्रा पांच बरस की उम्र से ही शुरू की। क्यों कि गायकी उन्हें विरासत में मिली है। पिता भी गायक थे। पर संगीत की बकायदा शिक्षा उन्हों ने गोरखपुर में ली। बड़े गुलाम अली खां के शिष्य और गज़ल गायक राहत अली से उन्हों ने गोरखपुर में विधिवत गायकी सीखी। पटियाला घराना की गायकी। वह पहले गज़लें ही गाते थे, अब भी गाते हैं पर पूछ उन की पंजाबी पॉप लोक गायकी से ही बढ़ी है। वह गज़लों पर भी अपना कैसेट निकालने की तैयारी में हैं पर इस से भी पहले वह भोजपुरी लोकगीतों को पॉप में ढाल कर एक कैसेट तैयार करना चाहते हैं। इस की भी तैयारी चल रही है। पंजाबी होने के बावजूद भोजपुरी से उन को खास लगाव है और वह ‘आरा हिले, बलिया हिले, छपरा हिलेला, हमरी लचके जब कमरिया सारी दुनिया हिलेला’, सरीखा गीत न सिर्फ झूम कर गाते हैं बल्कि कमर झकझोर कर जम कर नाचते भी हैं बिलकुल विदेशिया तर्ज पर। वह गोरखपुर में रहे अपने दिन याद करते हैं कि कैसे जटाशंकर पोखरा मोहल्ले में वह रहते थे। वह कहते हैं, ‘मुझे भोजपुरी से ज़्यादा लगाव है क्यों कि जहां आदमी पैदा होता है वह भाषा प्यारी लगती है।’ दलेर मेंहदी अभी लखनऊ आए तो उन से खास बातचीत की। पेश है बातचीतः

‘बोल तरररर’ गीत न होता तो आप क्या होते?
- तब भी गा रहा होता। अब भी गा रहा हूं। हालां कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोग मुझे भंगड़ा का बादशाह कहने लगे हैं। पर सच्चाई यह है कि मैं अभी भी स्ट्रगल कर रहा हूं। तब जब कि मेरे कैसेट अब चीन में भी बिकने लगे हैं और भारत में कोचीन में भी जहां लोग हिंदी नहीं जानते। अफ्रीका में भी। लेकिन मैं इसे बड़ी सफलता नहीं मानता। आप मेरी मानें तो कम से कम १०-१५ साल अभी और लगेंगे नाम कमाने में। हालां कि लोग भांगड़ा का बादशाह कह रहे हैं पर मेरा कहना है कि अभी यह सफलता समंदर का कतरा है। मुझे तो समंदर जितनी सफलता चाहिए।

अभी आप भोजपुरी की बात कर रहे थे?
- हां, भोजपुरी फोक को भी जल्दी ही ले कर आऊंगा। पंजाबी की ही तरह। क्यों कि भोजपुरी से मुझे बड़ा लगाव है। जहां आदमी पैदा होता है, वह भाषा प्यारी लगती है।

कौन-कौन से भोजपुरी गाने आप ने अपने लिए चुने हैं?
- भोजपुरी गानों पर काम तो शुरू कर दिया है पर पूरी प्लानिंग नहीं बताऊंगा। क्यों कि प्लान आउट करने से चोरी हो जाता है। ‘आरा हिले, बलिया हिले’, बहुत पुराना गाना है पर कुछ समय पहले जी.टी.वी. पर गा दिया तो इसे बंबई को लोगों ने फ़िल्मों में पार कर दिया।

क्या यह कैसेट भी मैगना साउंड से ही रिलीज होगा?
- बिलकुल।

क्या मैगना साउंड से पक्का सौदा है कि उसी के लिए गाएंगे?
- यह तो दिल का सौदा है। जब तक दिल लगा रहेगा, उन्हीं के लिए गाएंगे।

क्या और किसी कंपनी ने आफर नहीं दिया?
- हर कैसेट कंपनी चाहती है, हर कीमत पर। मुंह मांगी कीमत देने को तैयार हैं। पर हम को बहुत सोच समझ कर काम करना है। साल में ५-५ कैसेट फेंकने का काम नहीं करना है। एक से ही बहुत इज्जत मिलती है।

अच्छे भोजपुरी गानों को भी क्या आप पॉप में ढाल कर गाएंगे?
- हां, पॉप में ही ढाल कर। पंजाबी फोक को जो अन्तरराष्ट्रीय मान्यता मिली है, वह पॉप के ही नाते मिली है। भोजपुरी फोक को भी पॉप में ढाल कर अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता दिलाने की कोशिश करूंगा।

अभी अमिताभ बच्चन ने जो ईर-बीर फत्ते को पॉप में ढाल कर पेश किया है, उस की बड़ी निंदा हुई है।
- ईर-बीर फत्ते पॉप है भी नहीं। अमिताभ ने उसे बच्चों के लिए बनाना चाहा था। पर जब बन कर आया तो कुछ और ही निकला।

आप गज़लों पर भी काम कर रहे हैं तो क्या गज़लों को भी पॉप में ढाल कर पेश करेंगे?
- नहीं, गज़ल को कैसे पॉप में ढाल दूंगा? खराब थोड़े ही करूंगा गज़लों को।

अभी सलमा आगा ने कुछ गज़लें पॉप स्टाइल में गाई हैं।
- सलमा आगा हिरोइन हैं, गायिका नहीं, वह कुछ भी कर सकती हैं। उस से हमें क्या?

आप ने साल भर में ही ढेर सारे पंजाबी लोक गायकों की छुट्टी कर दी। मान, मिल्किन सिंह सब पीछे हो गए?
- अगर पोजीशन देखी जाय तो १९९५ में तरररर आया। कोई अंग्रेजी कैसेट या फ़िल्मी कैसेट भी इतना नहीं बिका जितना तरररर बिका। मेरे दूसरे कैसेट छुई-मुई में दर्दी रब का भी यही हाल है पर रही बात किसी की छुट्टी करने की तो क्या है ऊपर वाला है। ऊपर वाले का रंग है। अपना कुछ नहीं है। सारे गुलाब उसी के हैं। चाहे हम हों या कोई और।

आप के हाथों में अंगूठियां बहुत हैं। क्या बहुत कष्ट में हैं?
- नहीं, ऐसी बात तो नहीं।

ज्योतिष या पंडित यों ही तो यह अंगूठियां नहीं पहनाते?
- मैं ने किसी से मांगी नहीं। प्यार से मिली हैं। कुछ पीर, साहब, कुछ गुरु जी ने दी है।

कहां के पीर ने दी?
- बताना नहीं चाहिए।

आप बातचीत में बहुत आध्यात्मिक हो रहे हैं, तो क्या शबद कीर्तन भी गाने का इरादा है?
- बिलकुल गाएंगे समय आने पर।

आपका रूटीन क्या है?
- गाना। गाना चलता रहता है। आप से बात कर रहा हूं पर भीतर भीतर ध्यान गाने में ही लगा है।

कहा जा रहा है कि आप की छोटी बेटी प्रभजोत आप के लिए भाग्यशाली बन कर पैदा हुई है?
- सही है। अजान करती हुई वह पैदा हुई है। दोनों कान हाथ पर रखे। हाथ में मेंहदी लगी हुई। यकीन करता हूं कि उस में रूह है। मैं उसे पीर साहब कहता भी हूं प्यार से।

फ़िल्मों में आप जा नहीं रहे कि कोई बुला नहीं रहा?
- फ़िल्मों में पूरी इंडस्ट्री बुला रही है। मु्ज़फ़्फ़र अली, अमिताभ बच्चन, दिलीप कुमार सभी कह रहे हैं पर अभी नहीं जा रहा। मन नहीं करता अभी।

क्या आप खुद भी प्रोड्यूसर तो नहीं होने जा रहे?
- मैं भी प्रोड्यूसर बन सकता हूं।

राहत अली आप के गुरु थे, अभावों में मर गए। दवा के बिना। आप ने कुछ नहीं किया?
- गुरु थे वह हमारे। हम उन के लिए कुछ भी कर सकते थे। पर दवा के अभाव में नहीं मरे। शराब ने उन्हें मार डाला। मैं ने उन्हें समझाया बहुत था। पर वह कहते १३ वर्ष की उम्र से मेरे साथ है, कैसे छोड़ दूं। नहीं छोड़ा तो शराब उन्हें हम से छुड़ा ले गई।

आप को नहीं लगता आप को कामयाबी बहुत देर बाद मिली?
- यह कामयाबी बहुत देर बाद मिली सच है। संघर्ष भी बहुत किया। गरीबी बहुत देखी। कितने-कितने दिन खाना नहीं खाया। बहुत कुछ किया। अमरीका जा कर टैक्सी चलाई। बर्गर बेचा। यह १९८६ की बात है। और जो यह कामयाबी है समंदर का कतरा भर है मेरा संघर्ष तो अभी भी चल रहा है।

हॉबी?
- अच्छा गाना, अच्छा खाना।

खाने में परहेज?
- जो रियाज करते हैं, कोई परहेज नहीं करते खाने में। नकली गाने वाले परहेज करते हैं।

आप के वीडियो कैसेट में आप की गायकी होती है और ढेर सारी कुल्हे मटकाती अधनंगी लड़कियां। आप कम ही दिखते हैं। क्या माना जाए कि लड़कियों के बूते आप लोकप्रियता बटोर रहे हैं?
गलत कह रहे हैं। मेरे कैसेट में मैं ही ज़्यादा होता हूं। लड़कियां तो कहती हैं कि दलेर के साथ काम नहीं करना क्यों कि दलेर ही छाया रहता है।

[१९९६ में लिया गया इंटरव्यू]

1 comment:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि कि चर्चा कल मंगल वार 19/2/13 को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका हार्दिक स्वागत है

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