Friday, 8 January 2016

गंगा सागर हो आया हूं अब तुम्हारे द्वार आना चाहता हूं

फ़ोटो : अनन्या पांडेय

ग़ज़ल

तीरथ सारे  कर चुका अब तुम्हारे साथ आना चाहता हूं
गंगा सागर हो आया  हूं अब तुम्हारे द्वार आना चाहता हूं

मोह माया सब हमारे साथ है छूटा नहीं है कुछ भी न छूटेगा
दुनिया जालिम हो बुरी हो पर इसी दुनिया में जीना चाहता हूं

बहुत हो चुका पाखंड जीवन में और चल सकता नहीं किसी सूरत
प्रेम की अपनी पाठशाला में फिर तुम को बेकरार करना चाहता हूं

ज़िंदगी के जंगल में सांस की सरगम बांसुरी की मीठी तान सी है
बजे तबला धिनक धिन तो रवि शंकर का सितार होना चाहता हूं

चश्मा रंगीन हो और नज़र साफ तो सब कुछ रंगीन लगता है
दिलकश और दिलचस्प दुनिया है सरे आम कहना चाहता हूं

पैसा पावर सेक्स का जाल है बहुत गहरा इसे तोड़ना मुश्किल
हिप्पोक्रेटों की बात अलग है पर मैं खुले आम कहना चाहता हूं

[ 8 जनवरी , 2016 ]

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