Thursday, 7 July 2016

आतंक का मज़हब नहीं होता यह गाना बेसुरा लगता है

फ़ोटो : अनिल रिसाल सिंह

ग़ज़ल 

आतंकवाद को आतंकवाद कहना उन को बुरा लगता है
आतंक का मज़हब नहीं होता यह गाना बेसुरा लगता है

सेक्यूलर कहलाने का फैशन अब सिर्फ़ हिप्पोक्रेसी  है
मज़हबी आतंक पर उन को चुप रहना अच्छा लगता है

ज़मीनी लड़ाई लड़ने में अब दोस्तों का यकीन उठ गया
उन को आज़ादी के फर्जी नारों में जीना अच्छा लगता है

स्काच का जाम है कबाब है चिकन मटन बिरयानी भी
ए सी कमरे में बैठ लफ्फाजी करना अच्छा लगता है 

धर्म अफीम है वह कहते तो हैं लेकिन मानते कहां हैं
मनुष्यता नहीं  सांप्रदायिक तुष्टिकरण अच्छा लगता है

आतंकियों के खिलाफ चुप रहना भी एक स्ट्रेटजी है 
हिंदुत्व की कड़ाही में ऐसे घी डालना अच्छा लगता है

 [ 7 जुलाई , 2016 ]

5 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (09-07-2016) को  "आया है चौमास" (चर्चा अंक-2398)     पर भी होगी। 
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (09-07-2016) को  "आया है चौमास" (चर्चा अंक-2398)     पर भी होगी। 
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " मज़हबी या सियासी आतंकवाद " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  4. बेहद खूबसूरत

    ReplyDelete
  5. सेक्यूलर कहलाने का फैशन अब सिर्फ़ हिप्पोक्रेसी है
    मज़हबी आतंक पर उन को चुप रहना अच्छा लगता है

    umda samyik rachna

    ReplyDelete