Tuesday, 5 April 2016

पठानकोट पर गुमनाम पाकिस्तानी वेबसाइट की फर्जी ख़बर को हथियार बनाया सेक्यूलर चैम्पियंस ने




पाकिस्तान में ही नहीं भारत में भी जहरीली और फर्जी गुमनाम वेबसाईटें गश्त कर रही हैं

पठानकोट मसले पर गुमनाम पाकिस्तानी वेबसाइट की फर्जी ख़बर को आज सेक्यूलर चैम्पियंस ने हथियार बना लिया और मुंह की खा गए । यह अजब था ।  लेकिन जैसे ही पाकिस्तान में पाकिस्तान टुडे नाम के किसी गुमनाम वेबसाईट टाइप अख़बार ने पठानकोट एयर बेस पर हमले की पाकिस्तान की जांच रिपोर्ट लीक होने की एक झूठी ख़बर जारी की और कांग्रेस इस रिपोर्ट को ले उड़ी। कांग्रेस ही नहीं समूची सेक्यूलर टीम मोर्चे पर तैनात हो गई।  देश की छीछालेदर ख़ातिर।  जितना कर सकते थे किया भी ।

क्या तो पाकिस्तान ने कहा है कि पठानकोट हमला भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों ने ही पाकिस्तान को बदनाम करने के लिए प्लान किया था । पूर्व मंत्री आनंद शर्मा ने आव देखा न ताव आग उगल दी । कटघरे में नहीं फांसी के फंदे पर मोदी सरकार को चढ़ा दिया ।  दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्र ने तो नरेंद्र मोदी को आई एस आई का एजेंट बता दिया । केजरीवाल ने मोदी को घुटना टेकने वाला प्रधान मंत्री बता दिया । नीतीश कुमार के थिंक टैंक के सी त्यागी ने भी जहर उगला। पर एक बार भी किसी ने इस पाकिस्तानी रिपोर्ट की सत्यता की जांच करने की ज़रूरत नहीं समझी । न्यूज चैनलों ने पैनल बिठा कर बहस शुरु कर दी । स्वयंभू विशेषज्ञ चीख़ने-चिल्लाने लगे। 

लेकिन देर शाम इस फर्जी रिपोर्ट की हवा निकल गई। पाकिस्तान के मशहूर पत्रकार हामिद मीर हंसते हुए बताने लगे कि पाकिस्तान में इस अख़बार का नाम भी कोई नहीं जानता। और कि पाकिस्तानी जांच टीम  पठानकोट के बाबत अभी रिपोर्ट तैयार कर रही है । गज़ब है यह मंज़र भी। हालत तो यह है कि भारत में भी ऐसे तमाम गुमनाम अख़बार और उन की ऐसी तमाम गुमनाम वेबसाईटें कुकुरमुत्तों की तरह उग आई हैं । यह  जहरीली और फर्जी गुमनाम वेबसाईटें रातोरात खड़ी हो जाती हैं । जो देश विरोधी रिपोर्टें तैयार कर सोशल साईटों पर जहर उगलने के लिए आवारा कुत्तों की तरह अकसर गश्त करती मिलती हैं । जिन का कोई सिर पांव नहीं होता । हां , लेकिन माहौल तो जहरीला बन ही जाता है । दिलचस्प यह कि इन गुमनाम वेबसाइटों को ज़्यादातर सेक्यूलर चैम्पियंस ही संचालित करते हैं । जहर उगलने के लिए । दिक्कत बड़ी एक यह भी है कि  इन सेक्यूलर चैम्पियंस को कोई  यह समझाने वाला भी नहीं है , न ही वह समझने वाले हैं कि नरेंद्र मोदी विरोध और देश विरोध दोनों दो बात है । काश कि इस का फ़र्क भी जो वह जान लेते तो उन के लिए कितना अच्छा होता । देश के लिए भी । यह ठीक है कि पाकिस्तान पर किसी सूरत विश्वास नहीं किया जा सकता और कि  उम्मीद बिलकुल नहीं है कि पाकिस्तान अपनी गलती क़ुबूल कर लेगा , दोषी मान लेगा । लेकिन एक बार अधिकृत रिपोर्ट का इंतज़ार कर लेने में क्या बहुत नुकसान हो जाता ? खाना अभी पका नहीं , आप ने चखा भी नहीं और गुण-दोष के गणित में आप उलझ गए । वह भी एक गुमनाम साइट के हवाले से । यह तो गुड बात नहीं है । 

2 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 07-03-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2305 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  2. बहुत सुन्दर.. नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं ...

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