Wednesday, 2 December 2015

मेरी बारिश से तुम्हारी आंखें झील


पेंटिंग : एस एच रज़ा

जब बारिश में शहर झील बन जाता है
तो इस विपदा में भी
तुम्हारी आंखें याद आती हैं

आते जाते देखता हूं
तो तुम्हारी आंखें 
झील सी नज़र आती हैं

तो क्या मैं बारिश बन जाता हूं
मेरी बारिश से
तुम्हारी आंखें झील

बारिश जब ज़्यादा हो जाती है
तो शहर में बाढ़ आ जाती है
आबादी बाढ़ में डूब जाती है 

तो क्या मैं ज़्यादा बरसने लगा हूं
तुम डूब गई हो
प्यार की बाढ़ में

शहरों का तो बिगड़ गया है
प्यार में भी पर्यावरण संतुलन बिगड़ता है क्या
बिगड़ता है तो और बिगड़ जाने दो

[ 2 दिसंबर , 2015 ]

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