Monday, 27 June 2016

प्यार में कभी अंहकार का आकाश नहीं होता

अभिनेत्री असीमा भट्ट


ग़ज़ल
 
फूल को अपनी ख़ुशबू का आभास नहीं होता
प्यार में कभी अंहकार का आकाश नहीं होता 
 
साथ रहें तो प्यार की दूर रहें तो याद की नदी 
ज़िंदगी से प्यार का कभी वनवास नहीं होता 

रूठना और मनाना भी प्यार में बहुत ज़रूरी है
अगर यह न हो तो प्यार का एहसास नहीं होता 

प्यार की नदी में जो एक बार डुबकी मार लेता है
तो कभी कुछ बुरा सोचने का अवकाश नहीं होता 
 
एक प्यार ही है शाश्वत शेष सब कुछ क्षण भंगुर
प्यार छोड़ दुनिया में कुछ भी शाश्वत नहीं होता 
 
राजा रानी इतिहास भूगोल बनते बिगड़ते रहते हैं 
पर प्यार का क़िस्सा कभी इधर उधर नहीं होता
 
[ 27 जून , 2016 ]

1 comment:

  1. फूल को अपनी ख़ुशबू का आभास नहीं होता
    प्यार में कभी अंहकार का आकाश नहीं होता
    बहुत सुंदर गजल ...

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