दयानंद पांडेय
यह फ़ोटो देखिए। रायपुर में ख़लीफ़ा टाइप का एक दलाल राजकुमार सोनी की है। अपने को रायपुर जसम का अध्यक्ष भी बताता है। पहले अपने को नक्सली बताते हुए नहीं अघाता था। पर जब भारत सरकार ने नक्सलियों का सफाया शुरू किया तो नक्सली बताना बंद कर दिया। नक्सली था भी नहीं। कोई दलाल , नक्सली हो भी कैसे सकता है ? ख़ैर अभी जसम की शरण में है। वस्तुत: यह न नक्सली है , न जसम का। यह दल्ला है कांग्रेस का। कांग्रेस सरकार के पूर्व मुख्य मंत्री भूपेश बघेल का दलाल है। बघेल का चुनाव प्रचार ही नहीं करता रहा है , चुनाव में ढपली बजा कर गाने गाता रहा है। सरकारी फंड से कार्यक्रम आयोजित कर लंबी रक़म डकारने का मास्टर है। भूपेश बघेल से कह कर अपनी पत्नी को खेल कोटे में सरकारी अधिकारी बनवा दिया। आज भी इवेंट मैनेजर बन कर दलाली करता है। लेखन के नाम पर शून्यता का आचार्य है। दलाली का सिद्ध आचार्य। रायपुर के कुछ मित्रों का कहना है कि भूपेश बघेल के शराब घोटाले में यह साझेदार है। पत्नी भाजपा सरकार की नौकरी बजाती है और यह दलाली की क्रांति करता है।
पत्रकारिता का चोला भी कुछ दिन तक ओढ़ चुका है। तहलका से लगायत राजस्थान पत्रिका तक से बेइज़्ज़त कर बाहर किया गया। पीत पत्रकारिता का झंडा फहराने में अग्रणी रहने के कारण राजस्थान पत्रिका ने आजिज आ कर इसे कोयंबटूर भेज दिया था। यह गया ही नहीं। अब चेहरा छुपाने के लिए जसम की शरण में है। इस की फ़ेसबुक वाल पर जाइए तो सिवाय जसम के कार्यक्रम के पोस्टर के अलावा कुछ अलग से लिखा कुछ नहीं मिलेगा। मुसलसल जसम के पोस्टर।
तीन दिन पहले मैत्रेयी पुष्पा का एक पुराना इंटरव्यू मैं ने पोस्ट किया है। मेरी मित्र सूची में नहीं था। साहित्य से इस का कोई सरोकार नहीं। पर इस इंटरव्यू पर कमेंट करने आ गया। मुझे इस मूर्ख के बारे में मालूम नहीं था। फिर मैंने इस को हर कमेंट पर जवाब देने की उदारता बरती। लेकिन यह मूढ़मति लगातार एक ही पहाड़ा पढ़ता रहा। विवश हो कर इस की वाल पर गया। तब इस की हवा निकालनी शुरू किया। अब यह इस डाल से उस डाल पर बंदर की तरह उछल-कूद करने लगा। इधर से दौड़ाओ तो उधर से कबड्डी-कबड्डी , उधर से दौड़ाओ तो इधर से कबड्डी-कबड्डी ! आख़िरी अस्त्र इस का नारंगी पर आ कर टिक गया। कहने लगा कि लखनऊ और गोरखपुर जसम से पता किया है कि नारंगी हो। लखनऊ जसम में एक मुस्लिम लीग का दल्ला है फरजाना मेहदी। इस की बातों से पता लग गया कि फरजाना ही इस को ब्रीफ कर रहा था। फरजाना मेहंदी की दवाई बहुत पहले कर चुका हूं। उस का मुस्लिम सांप्रदायिक चेहरा उसे दिखाया तो वह भी ब्लॉक कर चंपत हो गया। यह सब यही करते हैं।
फिर इस राजकुमार सोनी को अंबेडकर से लगायत राम विलास शर्मा तक पर बात करने का निमंत्रण दिया। यह मतिमंद कुछ जानता ही नहीं था। कहने लगा रायपुर बुलवा कर आप को सुन लूंगा। फ़ेसबुक पर नहीं। फिर इस से कई बार कहा कि अब संवाद नहीं करना चाहता। विदा लो। पर यह फिर-फिर चिपटा रहा। सो इसे भरपेट भोजन करवाता रहा। जल्दी ही समझ आ गया कि यह रंगा सियार अब भागा कि तब भागा। यह भी समझ आ गया कि यह अपने सारे कमेंट मिटा कर ब्लॉक कर बस भागने ही वाला है। कई फ़्राडाचार्य यही करते हैं। यह लोग मूर्खता भरी बात कर , नीचता की पराकाष्ठा दिखाएंगे और निरुत्तर हो कर , रफूचक्कर हो जाएंगे। अब स्क्रीन शॉट वग़ैरह लेने मुझे आता नहीं है। सो एक मित्र से अनुरोध किया कि कुछ स्क्रीन शॉट ले लें , इस के कमेंट के। मित्र ने स्क्रीन शॉट ले लिया। कुछ बाद के कमेंट रह गए। आख़िरी कमेंट मैं ने इस के कमेंट के प्रतिवाद में लिखा था , शर्म नहीं आती , दलाल शिरोमणि ! अंतत: यह सारे कमेंट डिलीट कर ब्लॉक कर चंपत हो गया। बतौर वाद-विवाद-संवाद इस राजकुमार सोनी और कमेंट का आनंद लीजिए। इस की वाल पर सिर्फ़ जसम के पोस्टर का भाव देखिए। इवेंट मैनेजर टाइप इस दलाल को बधाई दीजिए।
अलग बात है इस मतिमंद ने मेरा समय बहुत व्यर्थ किया और ऊर्जा भी l इतने में तो एक कहानी लिख ली होती l पर क्या करें वह एक पुराना शेर है न :
मैं वो आशिक़ नहीं जो बैठ के चुपचाप ग़म खाए यहां तो जो सताए या आली बर्बाद हो जाए ! अभी और भी बातें हैं इस राजकुमार सोनी नाम के दलाल के बारे में बताने के लिए। पर अभी इतना ही।
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अच्छी धुलाई की आपने इसकी।
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