Wednesday, 23 May 2018

2019 का लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी और उन की भाजपा के लिए वाटरलू साबित होने वाला है


कर्नाटक ने नाटक का दृश्य बदल दिया है । विपक्ष एकजुट है , जनता बेतरह नाराज । जनता तो खैर पहले से नाराज चल रही है । हालां कि विपक्षी पार्टियों के भाजपा के घेराव पर मुझे बिलकुल भरोसा नहीं है , न ही इन से कोई उम्मीद । यह अपने अंतर्विरोध में मारी जाएंगी । लेकिन 2019 का लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी और उन की भाजपा के लिए वाटरलू साबित होने वाला है । यह तो तय है । इस के  लिए ज़िम्मेदार नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार का निकम्मापन है । बदलती और बिगड़ती प्राथमिकताएं हैं । बेतहाशा मंहगाई , बेरोजगारी और भ्रष्टाचार है । 2014 के चुनाव में किए गए एक भी वादे को पूरा नहीं कर पाना है । अच्छे दिन का झूठा झांसा है । नरेंद्र मोदी भूल गए हैं कि देश ने उन को भारी विजय लफ्फाजी झोंक कर बढ़िया भाषण सुनने के लिए नहीं दिलाई थी । इस्लामिक आतंकवाद , मुस्लिम तुष्टिकरण मुख्य मुद्दा था । कोई माने न माने इस एक  केंद्रीय बिंदु पर भारी जीत मिली थी मोदी को । कांग्रेस समेत कमोवेश सभी पार्टियां सेक्यूलरिज्म के नाम पर मुस्लिम तुष्टिकरण में टापर थीं और कि हैं । लगा था नरेंद्र मोदी इस से कड़ाई से निपटेंगे । लेकिन नरेंद्र मोदी तो दांत चियारने लगे इस मुद्दे पर । घुटने टेकने लगे । लगातार । कश्मीर से धारा 370 हटाना , कश्मीर को देश की मुख्य धारा में जोड़ने में भी वह फेल हो गए । उलटे कश्मीर नीति पर उन के दोगलेपन ने उसे और उलझा दिया है । श्रीनगर से अलगाववाद की लपट जम्मू तक बढ़ आई है । पाकिस्तान के आतंकवादी मंसूबे और बढ़ते गए हैं । एक सिर के बदले दस सिर लाने का दावा भी झांसा ही साबित हुआ है । रमजान के बहाने एकतरफा सीजफायर जैसे दोगले फ़ैसले तुष्टीकरण की पराकाष्ठा है । नक्सल भी सिर उठाए खड़े हैं ।

बेंगलोर में मायावती सोनिया की केमेस्ट्री 
सेना हताश हुई है जनता और निराश हुई है , लेकिन कार्पोरेट ख़ूब खुश हुआ है। भाजपा का हार्डकोर वोटर मारे शर्म के कशमकश में है । राम मंदिर मुद्दे पर अटल जी के राज में भाजपा कहती थी , बहुमत की सरकार होती तो कुछ करते । साझा सरकार है । विवशता है । जब बहुमत की नरेंद्र मोदी सरकार आई तब इस सरकार ने चुप्पी साध ली । बिचौलियों को बातचीत पर लगाया मंथरा की तरह और सुप्रीम कोर्ट की तकिया लगा कर सो गई । दशरथ ने राम को वनवास पर भेजा था , नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर मुद्दे को वनवास दे दिया । तो कश्मीर में 370 और राम मंदिर बट्टे खाते में । बेरोजगार पकौड़े तलेंगे , नीरव मोदी , मेहुल और विजय माल्या  जैसे मक्कार हजारो करोड़ गड़प कर ऐश भोगेंगे । अच्छा राहुल गांधी, रॉबर्ट वाड्रा जैसे आर्थिक अपराधी जेल गए क्या ? चार साल बीत गए हैं । मुलायम , मायावती जैसे आर्थिक अपराधियों का क्या हुआ ? बस लालू जैसे एक आर्थिक अपराधी को जेल भेज कर कौन सा तीर मार लिया । साल , छ महीनों में क्या हथेली पर सरसों उगा लेने का इरादा है  । टू जी स्पेक्ट्रम के सारे आरोपी बरी हो गए । छल-कपट से जगह-जगह सरकारें बना लेना विजयी नहीं बनाता , तिकड़मी बनाता है । कर्नाटक में तो यह तिकड़म भी त्राहिमाम मांग गई । इस बहाने सारे क्षत्रप एक मंडप में खड़े हो कर भाजपा के बाल उतारने को तैयार खड़े हो गए । यह ठीक है कि वह सभी कभी चुनाव में एक साथ सचमुच कभी खड़े नहीं हो सकते । सब के अपने-अपने भय और अपने-अपने स्वार्थ हैं । पर आप तो कायरों की तरह आंबेडकर की पैंट की जेब में जा कर बैठ गए हैं । नरेंद्र मोदी बताते नहीं अघा रहे हैं कि आंबेडकर ने मुझ को प्रधान मंत्री बनाया। अरे भाई कब और कैसे ? आंबेडकर भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में कब से समा गए । अम्बेडकर और आरक्षण की ड्रामेबाजी में सवर्ण वोटर भी भाजपा के कोटर से बाहर निकल गया है । दलित एक्ट के दुरूपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की लगाम आप को रास नहीं आ रही । फिर कश्मीर में महबूबा शरणम गच्छामि ने भाजपा को किस गड्ढे में भेज दिया है , भाजपा के नीति नियंताओं को कुछ खबर भी है भला । बिलकुल नहीं है । आंबेडकर का नाम ले कर देश को कार्पोरेट के हाथ गिरवी रख देना , राज करना नहीं होता । देश को गुलाम बनाना होता है । इस समय देश में मोदी नहीं , कार्पोरेट का शासन है । बढ़ती मंहगाई और बेरोजगारी इसी का परिणाम है । सरकार जब बनी तो गांधी का नाम राम की तरह ले रहे थे । अब सिर पर चुनाव है तो आंबेडकर का नाम राम की तरह लेने लगे । तो सिर्फ इस लिए कि अम्बेडकर के नाम पर वोट की फसल है , गांधी के नाम पर नहीं , राम के नाम पर नहीं । यह तो सरासर धूर्तई है । मुंह में राम बगल में छुरी है ।

बेंगलोर में अखिलेश मायावती 
राम-राम करते-करते , अम्बेडकर-अम्बेडकर जपना सिर्फ़ छल-कपट है । पराया माल अपना वाली बात है ।दलित वोट ऐसे तो मिलने से रहे । आज की तारीख में देश में जो माहौल है भाजपा के प्रति दलित और मुस्लिम वोट भाजपा को जाते नहीं दिख रहे । दलितों के यहां भोजन की नौटंकी फोटो सेशन और खबर भर के सेंसेशन के लिए है , वोट में यह दलित भोज कनवर्ट नहीं होने जा रहे । ठीक वैसे ही जैसे विदेश यात्राएं वोट में कनवर्ट नहीं होतीं । फिर दलितों और मुस्लिमों की जी हुजूरी करने के लिए , उन की कोर्निश बजाने के लिए , विदेश यात्राएं कर कार्पोरेट की दलाली करने के लिए जनता ने वोट नहीं दिया था । यह बात नरेंद्र मोदी और उन की भाजपा को जितनी जल्दी समझ आ जाए , उतना अच्छा होगा ।  मीडिया रिपोर्ट और इंटेलिजेंस रिपोर्टें अकसर सत्ताधारियों को खुश रखने के लिए बनती हैं । भगवान की तरह पूजा करती हैं । लेकिनमीडिया और इंटेलिजेंस ,  इन दोनों को भगवान बदलने में क्षण भर की भी देरी नहीं लगती । पेट्रोल , डीजल के दाम कारतूस बन कर नरेंद्र मोदी सरकार पर दगने को तैयार है । आलू , प्याज , दाल , अनाज हर चीज़ में आग लगी है । गरीब और ईमानदार आदमी का जीना दूभर हो गया है । मंहगाई , बेरोजगारी , भ्रष्टाचार सब कुछ कांग्रेस राज जैसा ही है । भारत की धरती पर इस चार में साल बदला क्या है । कुछ भी नहीं। फर्क बस इतना ही है कि मनमोहन चुप रहते थे , मोदी बोलते बहुत हैं । पर चीजें और बदरंग हुई हैं । हिंदू , मुस्लिम सांप्रदायिकता में खाई और चौड़ी हुई है । ईसाई सांप्रदायिकता ने भी फन काढ़ लिया है । जी डी पी , और रुपए के नित नए अवमूल्यन ने जैसे स्थाई घर बना लिया है । नोटबंदी , जी एस टी जैसे मुद्दे तात्कालिक विजय की फूल माला बन कर रह गए हैं । फायदा कम , नुकसान ज्यादा हुआ है । हर मोर्चे पर फेल इस फासिस्ट सरकार ने अगर अपनी गलतियां और प्राथमिकताएं समय रहते नहीं बदलीं तो कोई गाय माता भी 2019 में नरेंद्र मोदी की सरकार को नहीं बचा पाएंगी । राहुल गांधी जैसे गड्ढे के भरोसे भाजपा को आगामी लोकसभा चुनाव जीतने का सपना तोड़ लेना चाहिए । 

राहुल गांधी लाख लतीफ़ा हों पर अब उन की माता सोनिया गांधी के पीछे सारा विपक्ष लामबंद हो चुका है । भाजपा और नरेंद्र मोदी को इस निकम्मे विपक्ष से भले डर न लगे लेकिन भारत की जनता से ज़रुर डरना चाहिए । भारत की जनता आज की तारीख में नरेंद्र मोदी से बेतरह नाराज है । तबाह है । नरेंद्र मोदी ने मनमोहक भाषण देने के अलावा बीते चार साल में कुछ नहीं किया है । चुनाव घोषणा पत्र के अपने एक भी वादे को पूरा नहीं किया है । सिर्फ़ अच्छे दिन आने वाले हैं के स्लोगन का झांसा दिया है । अच्छे दिन के बजाय देश के बहुसंख्यक लोग बुरे दिन का सामना कर रहे हैं । इसी लिए फिर दुहरा रहा हूं कि 2019 नरेंद्र मोदी और उन की भाजपा के लिए वाटरलू साबित होने वाला है । भारत की जनता वह जनता है जो वक्त आने पर राजा राम को माफ़ नहीं करती , नेहरु , इंदिरा को माफ़ नहीं करती , नरेंद्र मोदी क्या चीज़ हैं भला । इस बात को नरेंद्र मोदी और उन की भाजपा को भी जान लेना चाहिए । जिस कांग्रेस से नाराज हो कर लोगों ने भाजपा को सिर माथे पर बिठाया था , आंख मूद कर बिठाया था , वह भाजपा और उस के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस से भी गए बीते साबित हुए हैं ।

बेंगलोर में एकजुट विपक्ष की हुंकार 

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (26-05-2017) को "उफ यह मौसम गर्मीं का" (चर्चा अंक-2982) (चर्चा अंक-2968) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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