Friday, 20 November 2015

सच यह है कि आज पटना में नरेंद्र मोदी विरोधी नहीं, नरेंद्र मोदी से सभी डरे हुए लोग इकट्ठे हुए



पटना में आज नरेंद्र मोदी विरोधी लोग इकट्ठे हुए यह कहना ग़लत है।  सच यह है कि आज पटना में नरेंद्र मोदी से सभी डरे हुए लोग इकट्ठे हुए। इसी लिए नरेंद्र मोदी को अब सचमुच डर कर नहीं रहना चाहिए। क्यों कि इस में से ज़्यादातर चोर और बेईमान लोग थे । परस्पर अंतर्विरोधी लोग थे । शिव सेना , वामपंथी और ममता बनर्जी का एक साथ एक मंच पर होना क्या बताता है ? शरद पावर , लालू प्रसाद जैसे बेईमान , चोर और अरविंद केजरीवाल जैसे ईमानदार का एक साथ , एक मंच पर होना । और तो और देवगौड़ा जिन्हों ने लालू को चारा घोटाला में बंद करवा कर जेल भेजा था , वह भी लालू के सैल्यूट में खड़े थे। अकाली के बादल भी । आपस में लड़-लड़ कर मर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा । इन डरे हुए लोगों में एक कमी थी तो बस लाल कृष्ण आडवाणी और शत्रुघन सिनहा की । 

शेर और मेमने एक साथ एक घाट पर पानी पीने लगें क्या भारतीय राजनीति में यह मुमकिन है ? राजनीति के जंगल में रहें यह तो मुमकिन है पर सत्ता के घाट पर ? नामुमकिन । नीतीश कुमार ख़ुद इंजीनियर हैं पर नौवीं पास तेजस्वी यादव बतौर उप मुख्य मंत्री उन के नंबर दो हैं ।  उन की कैबिनेट के एक और लाल तेज प्रताप यादव भले बारहवीं पास हों पर अपेक्षित और उपेक्षित का फर्क नहीं जानते । शपथ में राज्यपाल को इसे ठीक करवाना पड़ा । इन दोनों के पिता सिर्फ़ चारा और जाति जानते हैं । 

नीतीश कुमार अपने सुशासन के तंत्र में इन और इन जैसे और माननीय लोगों को कैसे नियोजित और संतुलित करेंगे यह समय की कसौटी पर है । पर यह तो तय है कि नरेंद्र मोदी से कहीं ज़्यादा कड़ी परीक्षा और चुनौती नीतीश कुमार की है । क्यों कि उन की कैबिनेट में एक से एक बाजीगर हैं । एक बार मेढक संभालना आसान है , लेकिन इन बाजीगरों को संभालना कठिन है । जंगल राज की दस्तक हो चुकी है । अपहरण और हत्याओं  की हालिया घटनाओं के मद्दे नज़र नीतीश के लिए बहुत शुभ नहीं है । नीतीश कुमार , लालू प्रसाद यादव और उन से उपजी चुनौतियों को अगर सचमुच मैनेज कर लेते हैं तब तो पक्का वह आगामी संसदीय चुनाव में नरेंद्र मोदी के लिए कड़ी चुनौती साबित होंगे । लेकिन अभी तो वह नरेंद्र मोदी से डरे हुए लोगों से घिरे हुए हीरो हैं । इन डरे हुए लोगों को अपनी ताकत में बदल पाना और उन का सकारात्मक उपयोग नीतीश कुमार की परीक्षा है । क्यों कि हर बार मोहन भागवत का आरक्षण संबंधी बयान उन के लिए लाटरी बन कर उपस्थित हो यह ज़रूरी नहीं है । दाल और प्याज की क़ीमत हर बार बढ़ी हुई तो नहीं होगी । डर अब यही है कि मोदी की हवा निकालने के फेर में इन हारे और डरे हुए लोगों से घिरे नीतीश कुमार कहीं अपनी हवा न निकाल बैठें । नीतीश कुमार के लिए फ़िलहाल बहुत कठिन है डगर पनघट की। ईश्वर उन की मदद करे और वह सफल हों , मोदी की नाक में दम करने की अपनी मुहिम में । इस से भी ज़्यादा यह कि लालू प्रसाद यादव और उन के कुनबे से उन का दोस्ताना भी कामयाब रहे । 




1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (21-11-2015) को "काँटें बिखरे हैं कानन में" (चर्चा-अंक 2168) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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